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IIT मद्रास ने बनाई ऐसी टेक्नोलॉजी बोलने में असमर्थ लोगों को मिलेगी ज़बान

नई दिल्ली. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी मद्रास की रिसर्च टीम ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो बोलने में असमर्थ लोगों के मस्तिष्क संकेतों (ब्रेन सिगनल) को भाषा में बदल सकती है. बोलने में असमर्थ लोगों की मदद करने के अलावा इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल प्रकृति के संकेतों की व्याख्या करने में भी किया जा सकता है, जैसे कि पौधों की प्रकाश संश्लेषण (फोटो सिंथेसिस) प्रक्रिया या किसी बाहरी उत्तेजना के प्रति उनकी प्रतिक्रिया. इस रिसर्च टीम का नेतृत्व आईआईटी मद्रास के मकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ विशाल नंदीगाना ने किया है.

विद्युत संकेत, मस्तिष्क संकेत या कोई भी संकेत, सामान्य रूप से, वेवफॉर्म होते हैं जो भौतिक नियम या गणितीय परिवर्तनों जैसे फोरियर ट्रांसफॉर्म या लाप्लास ट्रांसफॉर्म का उपयोग करके सार्थक जानकारी तक डिकोड कर सकते हैं. ये भौतिक नियम और गणितीय परिवर्तन विज्ञान आधारित भाषाएं हैं जिन्हें सर आइजैक न्यूटन और जीन-बैप्टिस्ट जोसेफ फूरियर जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों द्वारा खोजा गया था.

इस रिसर्च के बारे में बताते हुए, प्रमुख शोधकर्ता, डॉ. विशाल नंदीगाना ने कहा, यह तकनीक आयनों के प्रवाह का प्रतिनिधित्व करती है जो चार्ज किए गए कण होते हैं. इन विद्युत संकेतों को मानव भाषा में बदला जाता है जिससे हमें आउटपुट मिलता है.

विशाल नंदीगाना के मुताबकि यह हमें बताता है कि आयन हमारे साथ क्या संवाद कर रहे हैं. अगर हम इस प्रयास के साथ सफल हो जाते हैं तो हम न्यूरोलॉजिस्ट से इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल डेटा प्राप्त करेंगे. जिससे हम यह जान सकते हैं कि भाषण देने वाले मनुष्यों के मस्तिष्क में क्या संकेत चल रहे हैं और वह क्या बोलने की कोशिश कर रहे हैं.

साभार- खबर एनडीटीवी

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