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आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर एम्स ने बनाए विशेष जूते और छड़ी, आएगी आम लोगों के काम

नई दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर एक ऐसी छड़ी और जूते तैयार किए हैं जिनमें विशेष प्रकार का सेंसर लगा हुआ है. इनका इस्तेमाल नॉर्डिक वॉकिंग के लिए किया जाएगा.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स के जीरिएट्रिक मेडिसिन विभाग की ओर से जल्द ही नॉर्डिक वॉकिंग पर एक अध्ययन शुरू होने वाला है, जिसे भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की ओर से बजट भी मिला है. एम्स के वरिष्ठ डॉ. प्रसून चटर्जी की निगरानी में ये अध्ययन शुरू होगा.

इसमें वरिष्ठ नागरिक भी शामिल हो सकते हैं. एम्स के डॉक्टरों ने अध्ययन में शामिल होने के लिए दिल्ली के बुजुर्गों को आमंत्रण भी दिया है. इन्हें घर से एम्स तक निशुल्क यातायात सुविधा भी मिलेगी.

दरअसल, वॉकिंग (घूमना) का ही एक नया रूप नॉर्डिक वॉकिंग है, जिसमें दोनों हाथ में छड़ी का सहारा लेकर वॉकिंग की जा सकती है.

एम्स प्रबंधन के अनुसार, इफेक्ट ऑफ स्मार्ट नॉर्डिक वॉकिंग ट्रेनिंग ऑन मोबिलिटी इंडिपेंडेंस इन कम्यूनिटी एल्डरली विषय पर एक पायलट अध्ययन किया जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इसमें 60 या उससे अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिक भाग ले सकते हैं. आईआईटी के साथ मिलकर इस अध्ययन के लिए पोल्स (छड़ी) और जूते तैयार किए हैं.

इनमें सेंसर लगे हैं, जो मांसपेशियों के अलावा गति आदि के बारे में जानकारी देते रहेंगे. अध्ययन के दौरान एम्स के फिजियोथेरेपिस्ट्स की निगरानी में वरिष्ठ नागरिक इन विशेष जूते और छड़ी के साथ स्मार्ट नॉर्डिक वॉकिंग करेंगे. इसमें शामिल होने के लिए न्यू प्राइवेट वार्ड के भूतल स्थित विभाग के कमरा नंबर 3 में संपर्क किया जा सकता है.

साभार- अमर उजाला

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