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सतह तक पहुंचती ऑनलाइन शिक्षा, सदियों का काम हुआ महज कुछ दिनों में

आशुतोष शुक्ला(सीतापुर). महमूदाबाद सीतापुर कोरोना महामारी के चलते देश में ही बुरे दौर से गुजर रहा है. लेकिन इस बुरे दौर में जहां पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरो दिया है. वहीं जिन बदलावों को जमीनी स्तर तक पहुंचने में शताब्दियाँ लग जाती थी उसे कुछ दिनों में ही जीवन का अंग बनते देखा जा सकता है.

तहसीलों तक पहुंचती ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन का एक नवीन उदाहरण है. कोरोना महामारी को लेकर देश में चल रहे लॉक डाउन से पटरी से उतरी शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कुछ विद्यालयों ने ऑनलाइन क्लासेज शुरू कर बच्चों को पाठ्यक्रम से जोड़ने का प्रयास शुरू किया. करोना महामारी के पूर्व भीषण सर्दी के साथ कई अन्य अवकाश के चलते बीते सत्र में विद्यार्थियों का पढ़ाई को लेकर काफी नुकसान हुआ था. छात्रों के शैक्षिक नुकसान की भरपाई के लिए स्थानीय कॉलेजों के द्वारा शुरू की गई ऑनलाइन टीचिंग का अच्छा परिणाम देखने को मिल रहा है.

इसको लेकर शिक्षकों के साथ ही छात्र व अभिभावक भी काफी जागरूक दिख रहे हैं. कोरोना महामारी से नागरिकों को बचाने के उद्देश्य से सरकार ने बीती 22 मार्च से पूरी तरह संपूर्ण देश में लोग डाउन की घोषणा कर रखी है. जिसके तहत स्कूल कॉलेज भी लगातार बंद चल रहे हैं. ऐसे में सरकार ने प्राइमरी जूनियर के साथ कक्षा 9 व 11 के छात्रों को बिना परीक्षा की अगली कक्षा में उत्तीर्ण किए जाने का फरमान जारी किया है. इस फरमान से बच्चों को कक्षा कक्षाएं तो मिल जाएगी किंतु उनके बौद्धिक ज्ञान को कहां से पूरा किया जाए इसकी चिंता करते हुए सीता ग्रुप ऑफ एजुकेशन के प्रबंधक आरके बाजपेई ने बताया कि कॉलेज नर्सरी से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए अनुभवी शिक्षकों के द्वारा ऑनलाइन व्यवस्था 2 अप्रैल से शुरू की गई है।जिसका बहु आयामी लाभ दिखाई दे रहा है. एक तरफ तो शिक्षार्थी अपने ज्ञान अर्जन से लाभान्वित को ही रहे हैं. साथ ही, तकनीकी रूप से भी उनकी बौद्धिक क्षमता है प्रवीण हो रही है . जनसामान्य और अभिभावकों की ओर से भी ऐसे कार्य की सराहना की जा रही है.

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