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कोरोना संकट से गांव की ओर लौटे मज़दूरों के लिए ABVP ने की बड़ी पहल, सिखाई खेती की बारीकियां

 

कौशांबी. मंगलवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, कौशांबी (काशी प्रांत) द्वारा आयोजित बेविनार (व्याख्यानमाला) द्वारा प्रवासी मजदूरों की गांव वापसी पर कृषि क्षेत्र में संभावनाएं विषय पर कृषि विज्ञान केंद्र, कौशांबी के मृदा वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार सिंह किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी किसानों को प्रदान की।

डॉ सिंह ने कहा कि किसान भाइयों एवं श्रमिकों के लिए राज्य सरकार के कृषि विभाग द्वारा हरित योजना का संचालन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से निशुल्क उत्तम क्वालिटी के बीज उर्वरक एवं जरूरी संयंत्रों को प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार कौशल क्षमता के अनुसार एक सूची तैयार कराने का भी काम कर रही है, जिसके माध्यम से किसानों को जल्द ही विभिन्न कृषि प्रशिक्षण एवं आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। डॉ सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान के निदेशक के दिशा निर्देशन में कृषि छात्रों के कौशल में वृद्धि के लिए भी तरह-तरह के कार्यक्रम का संचालन भी।

डॉक्टर मनोज ने उन्नत बीजों से लेकर सरकार की प्रमुख योजनाओं की भी जानकारी दी, जिससे मज़दूरों को आधुनिक किसान बनने में मदद मिल सके.

उन्होंने किसान उन्नतशील बीजों का प्रयोग कैसे करें, रासायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग कैसे करें एवं फसल उत्पादन में वृद्धि कैसे हो इस पर एक के बाद एक जानकारियां साझा की। डॉ सिंह ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर बनाने पर विचार किया जा रहा है जिसके माध्यम से किसानों के समूह बनाकर उन्हें कृषि यंत्र प्रदान करके उन्हें और अधिक मजबूत बनाएगी। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तिलहन, दलहन गेहूं एवं आयल सीड सभी के उन्नतशील बीजों को किसान भाइयों को अनुदान के रूप में प्रदान किया जाएगा और खेतों में प्रदर्शन भी करवाया जाएगा। किसानों को अपने उत्पाद बेचने के लिए ऑनलाइन मंडी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान किया।

डॉ सिंह ने राज्य सरकार द्वारा कृषि आत्मा योजना, कृषि सिंचाई योजना, कृषक प्रशिक्षण योजना, फार्म मशीनरी बैंक, रूरल यूथ प्रशिक्षण समेत तमाम कृषि योजनाओं द्वारा किसानों को खुद को प्रशिक्षित करके लाभान्वित होने का आग्रह भी किया। उन्होंने किसान भाइयों से मृदा परीक्षण के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि मृदा परीक्षण कराने के पश्चात मृदा स्वास्थ्य कार्ड की रिपोर्ट के अनुसार ही फसलों की बुवाई हितकर है, क्योंकि किसान भाइयों द्वारा लगातार अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग खेतों को बंजर बना रहा है और फसल उत्पादन में भी गिरावट आई है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से किसानों को यह पता चल पाता है कि कौन-कौन से पोषक तत्वों की कमी है? मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के बाद खेतों में बुवाई की लागत से लेकर फसल उत्पादन तक अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है।

उन्होंने बताया कि गांव में बिजली की समस्या को देखते हुए सरकार ने सोलर पंप की व्यवस्था भी किसान भाइयों के लिए की है। डॉ सिंह ने बताया कि कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 90% अनुदान पर किसान भाइयों को सिंचाई के उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं।
उद्यान विभाग की योजना के बारे में बताया कि फल फूल सब्जी के उत्पादन का तकनीकी प्रशिक्षण विज्ञान केंद्र द्वारा एवं फसल पौध उद्यान विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है। इस अवसर पर जिला प्रमुख आयुष कुमार साहू, जिला संगठन मंत्री अनिल त्रिपाठी, सिंचाई बंधु के पूर्व उपाध्यक्ष चंद्र शुक्ला समेत तमाम कार्यकर्ता एवं कृषक ऑनलाइन वेबीनार कार्यक्रम में जुड़े। अंत में जिला प्रमुख आयुष कुमार साहू ने वैज्ञानिक डॉ मनोज कुमार सिंह का आभार ज्ञापित किया।

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