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माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नाट्यशास्त्र पर हुआ व्याख्यान

नई दिल्ली : भरतमुनि का नाट्यशास्त्र रामायण और महाभारत काल के पहले का है। वैसे तो इसमें नाट्य के सिद्धांत हैं, किन्तु नाट्यशास्त्र के सम्बन्ध में कहा जाता है कि दुनिया में ऐसा कुछ नहीं, जो इसमें नहीं है, या कहें कि इस दुनिया में जो कुछ है, वह सब नाट्यशास्त्र में सम्मिलित है।

इसमें विश्व के सभी विषयों का समावेश है। सभी प्रकार के संचार के सिद्धांत भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में मिलते हैं। संचार को लेकर इसमे कई संभावनाएं हैं। यह विचार संचार शोध के विशेषज्ञ एवं काठमांडू विश्वविद्यालय, नेपाल के प्राध्यापक डॉ. निर्मल मणि अधिकारी ने व्यक्त किये। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के आयोजन ‘हिन्दी पत्रकारिता सप्ताह’ के अंतर्गत उन्होंने ‘भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में संचार के सूत्र’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया।

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