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IIT-मंडी ने तैयार किया खास मास्क, धोने के बाद करीब 30 बार किया जा सकेगा इस्तेमाल

नई दिल्ली. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक की बेकार पड़ी बोतलों का इस्तेमाल करके एक उच्च दक्षता वाले मास्क बनाने के लिए एक तकनीक विकसित करने का दावा किया है.

शोधकर्ताओं का दावा है कि इस तकनीक के जरिए बनाए जाने वाले इस तरह के मास्क से व्यावसायिक रूप से उपलब्ध मास्क की तुलना में न केवल आसानी से सांस ली जा सकती है बल्कि इसे 30 बार तक धोकर फिर से उपयोग किया जा सकता है.

आईआईटी मंडी की टीम ने ‘इलेक्ट्रोसपिनिंग’ पर आधारित इस तकनीक के लिए पेटेंट भी दाखिल किया है. आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर, सुमित सिन्हा रे के अनुसार, एन 95 स्तर के मास्क बनाने के लिए प्लास्टिक की बेकार पड़ी बोतलों का इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने कहा, ‘जब हम सुनतें है कि कुछ प्लास्टिक से बना है तो हमारी चिंता यह रहती है कि क्या यह उपयोग करने के लिए सुरक्षित है. ये बैक्टीरिया और संक्रामक घटकों को दूर कर उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं. इन मास्क के जरिए आसानी से सांस ली जा सकती है और ये व्यावसायिक रूप से उपलब्ध मास्क की तुलना में बेहतर हैं.’

सहायक प्रोफेसर रे ने कहा, ‘प्रयोगशाला पैमाने पर, मास्क के लिए सामग्री की लागत लगभग 25 रुपए प्रति मास्क थी. हालांकि, वाणिज्यिक विनिर्माण स्तर के दौरान, इसकी लागत लगभग आधी हो जाएगी. मास्क को 30 बार तक धोया और दोबारा उपयोग किया जा सकता है.’

टीम ने दावा किया है कि मास्क को मानक स्वच्छता उपायों की तुलना में उनके निपटान के लिए किसी अलग प्रोटोकॉल का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी.

कोरोना वायरस महामारी के कारण संक्रमण से बचने के लिए लोगों द्वारा मास्क पहनना जरूरी हो गया है. केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में लगातार पांचवें दिन रविवार को कोविड-19 के सबसे अधिक 9,971 मामले सामने आए जिससे देश में मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,46,628 हो गई जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 6,929 पहुंच गई है.

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