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उत्तराखंड सरकार ने बैठक कर दी जानकारी, यूजीसी गाइडलाइंस के आधार पर 24 अगस्त से होंगी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं

देहरादून।

उत्तराखंड के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में अध्ययनरत प्रथम व द्वितीय वर्ष के छात्रों को पांच अगस्त तक बिना परीक्षा के ही अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। जबकि फाइनल सेमेस्टर सहित वार्षिक मोड वाली सभी कक्षाओं की परीक्षाएं 24 अगस्त से होंगी।

सीएम त्रिवेंद्र रावत की अध्यक्षता में उच्च शिक्षा विभाग और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि यूजीसी गाइडलाइन के मुताबिक अंतिम वर्ष और अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं 24 अगस्त से 25 सितंबर के बीच आयोजित की जाएं। वार्षिक परीक्षा मोड वाली अन्य कक्षाओं की परीक्षाएं भी इसी के साथ होंगी। इसके बाद 25 अक्टूबर तक परीक्षाफल घोषित करते हुए 01 नवंबर से नया सत्र शुरू किया जाए। जबकि सेमेस्टर मोड वाली अन्य कक्षाओं के छात्रों को बिना परीक्षा लिए आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर पांच अगस्त तक अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। इन कक्षाओं की ऑनलाइन पढ़ाई 16 अगस्त से प्रारंभ हो जाएगी। 12वीं के रिजल्ट आने के साथ ही प्रथम वर्ष, सेमेस्टर के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी।

क्वारंटाइन सेंटर को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्देश –
सीएम ने 25 जुलाई तक कॉलेजों में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर को दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए। सब कुछ यदि सामान्य रहा तो छात्र एक अगस्त से परीक्षा पूर्व की औपचारिकता पूरी करने के लिए आ सकेंगे।

25 हजार छात्र बाहरी राज्यों के, दूसरे राज्यों से आने वालों की कोविड जांच जरूरी –
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि पूरे प्रदेश में लगभग 03 लाख छात्र- छात्राएं अध्यनरत हैं, जिनमें से लगभग 80 हजार अंतिम वर्ष या सेमेस्टर के हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 25 हजार छात्र बाहरी राज्यों से आते हैं, जिनको परीक्षा से पहले एक अगस्त तक अपने विश्वविद्यालय या कॉलेज में उपस्थिति देनी होगी। इन छात्रों को अपने प्रदेशों से कोविड-19 का टेस्ट कराना होगा। बैठक में प्रमुख सचिव आनंद वर्द्धन ने बताया कि सभी शक्षिक, कार्मिक नियमित रूप से अपने कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराएंगे। बैठक में कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एनके जोशी, मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ओपीएस नेगी, दून विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ एके कर्नाटक, श्रीदेव सुमन वश्विवद्यिालय के कुलपति डा पीपी ध्यानी आदि शामिल हुए।

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