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अंतिम वर्ष की परीक्षा पर पुनः करे विचार, ओडिशा राज्य के शिक्षा मंत्री ने एचआरडी मंत्रालय को फिर लिखा पत्र

नई दिल्ली।

यूजीसी ने रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी कर सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से यह अनुरोध किया है कि वे अपने यहां के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से कराये व सितंबर के अंत तक देश के सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं अनिवार्य रूप से करानी हैं। हाल ही में यूजीसी द्वारा यह कहा गया है कि आयोग द्वारा निर्धारित समय में हर राज्यों के विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को परीक्षा कराना अनिवार्य है। वहीं देश भर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाओं की अनिवार्यता को लेकर अब ओडिशा राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री, अरुण साहू ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पत्र लिखा है। ओडिशा शिक्षा मंत्री ने एमएचआरडी से विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं की अनिवार्यता समाप्त करने की अपील की है।

सुप्रीम कोर्ट में जल्द होगी सुनवाई –
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देश भर में विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में परीक्षाओं को लेकर हाल ही में 6 जुलाई 2020 को दिशा-निर्देश जारी किये थे, जिसके अनुसार अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को 30 सितंबर तक कराने को कहा गया था। इसी अनिवार्यता को लेकर जहां एक तरफ देश भर के छात्र संगठनों और विश्वविद्यालयों शिक्षकों की तरफ से विरोध हो रहा है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में भी अनिवार्यता समाप्त करने और वैकल्पिक तरीकों से मूल्यांकन करते हुए रिजल्ट जारी करने की मांग वाली याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।

यहाँ पढ़ें – अंतिम वर्ष की परीक्षा के यूजीसी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी गयी थी चुनौती, फैसला जल्द

एचआरडी मंत्री को पहले भी लिख चुके है पत्र –
बताते चलें कि ओडिशा शिक्षा मंत्री ने इससे पहले भी 9 जुलाई 2020 को एचआरडी मंत्री को इस सम्बन्ध पत्र लिखा था। कल, 23 जुलाई के पत्र में ओडिशा शिक्षा मंत्री ने लिखा कि पिछले पत्र लिखने के बाद से 15 दिनों के भीतर पूरे देश में कोविड-19 महामारी की स्थिति खराब हुई और आने वाले समय में और भी बिगड़ने की संभावना है। ऐसे में यूजी और पीजी की परीक्षाओं का ओडिशा राज्य में आयोजन न तो संभव है और न ही उचित है।

महामारी के संक्रमण की संभावना –
शिक्षा मंत्री ने लिखा कि परीक्षाओं के आयोजन से परीक्षार्थियों के साथ-साथ विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थानों के टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ और सभी के परिवार वालों में भी कोविड-19 महामारी के संक्रमण की संभावना रहेगी। ऐसे समय में जबकि सार्वजनिक यातायात लगभग अनुपलब्ध है, छात्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में भी समस्याएं होंगी।

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