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सुप्रीम कोर्ट ने UGC को जवाब दाखिल करने का दिया निर्देश, 31 जुलाई को सुनवाई

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के लगातार बढ़ते मामलों के बीच देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को सितंबर 2020 तक आयोजित कर लिये जाने के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के हाल ही में जारी दिशा-निर्देशों के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर आज, 27 जुलाई 2020 को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. एस. रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की वाली पीठ ने यूजीसी का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिये हैं कि आयोग की प्रतिक्रिया दाखिल की जाए। सुप्रीम कोर्ट में अब इस मामले की सुनवाई 31 जुलाई 2020 होगी।

वहीं दूसरी ओर छात्रों द्वारा देशव्यापी विरोध और प्रदर्शन हो रहे हैं। इन परिस्थितियों में विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं के आयोजन की अनिवार्यता के यूजीसी के दिशा-निर्देश रोल-बैक होंगे या विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर करा ली जाएंगी, इस पर स्थिति जल्द ही स्पष्ट होने की उम्मीद है।

यूजीसी गाइडलाइंस के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका

फाइनल ईयर या सेमेस्टर की परीक्षाओं के 30 सितंबर तक आयोजन किये जाने के विरोध में देश भर के 13 राज्यों एवं 1 संघ शासित क्षेत्र के कुल 31 छात्रों ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है। इस याचिका को लेकर यूजीसी का पक्ष रख रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील के बाद जस्टिस नागेश्वर राव की पीठ ने मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक भूषण की पीठ में किये जाने को कहा है। इस मामले की सुनवाई कल 27 जुलाई को हुई थी। जिसमें यूजीसी को जवाब दाखिल करने को कहा गया है और इस मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होनी है। इस याचिका में छात्रों ने मांग की है कि यूजीसी के परीक्षाओं की अनिवार्यता के निर्देश को रद्द किया जाए और छात्रों के आंतरिक मूल्यांकन या पिछली कक्षाओं/सेमेस्टर के अंकों के औसत के आधार पर रिजल्ट घोषित किया जाए। साथ ही, इन अंतिम वर्ष या सेमेस्टर के छात्रों के रिजल्ट 31 जुलाई 2020 तक जारी कर दिये जाएं।

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यूजीसी की गाइडलाइंस का हो रहा है पूरे देश में विरोध

फाइनल ईयर या सेमेस्टर की परीक्षाओं को अनिवार्य रूप से कराने के यूजीसी के 6 जुलाई 2020 को जारी निर्देश का पूरे देश में विरोध किया जा रहा है। देश भर के विश्वविद्यालयों के छात्र, छात्र-संगठन, जनप्रतिनिधि (मंत्री, सांसद, आदि) सभी गाइडलाइंस के विरोध में औपचारिक तौर पर विरोध दर्ज करा रहे हैं। ओडिशा राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने फिर से केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को 23 जुलाई को दोबारा पत्र लिखकर यूजीसी गाइडलाइंस को रद्द करने का मांग की थी। इससे पहले उन्होंने 9 जुलाई को भी केंद्रीय मंत्री के पत्र लिखा था।

वहीं, दूसरी तरफ ज्वाईंट फोरम फॉर मूवमेंट ऑन एजुकेशन (JFME) ने 1000 से अधिक छात्रों के समर्थन (सिग्नेचर) के साथ एक ऑनलाइन पेटिशन लांच किया है जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को अनिवार्य रुप से सितंबर तक कराने के यूजीसी के निर्देशों को रद्द करने की मांग की गयी है। इस ऑनलाइन पेटिशन में मूल्यांकन के लिए वैकल्पिक तरीकों इंटरर्नल एसेसमेंट और/या एवेरेज मार्क्स का इस्तेमाल करते हुए रिजल्ट जारी करने की मांग की गयी है।

क्या है यूजीसी का पक्ष?

देशव्यापी विरोध और सुप्रीम कोर्ट में याचिका से अलग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने सुप्रीम कोर्ट हुई सुनवाई में दौरान जानकारी दी कि देश भर के विश्वविद्यालों द्वारा या तो अंतिम वर्ष की परीक्षाएं या तो आयोजित की जा चुकी हैं या आयोजन की योजना बन चुकी है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यूजीसी ने जानकारी दी कि देश भर के 355 राज्य विश्वविद्यालयों, 51 केंद्रीय विश्वविद्यालयों, 121 डीम्ड विश्वविद्यालयों और 291 निजी विश्वविद्यालयों से आयोग को परीक्षाओं को लेकर रिस्पांस मिल चुके हैं। इन विश्वविद्यालयों द्वारा परीक्षाओं के ऑनलाइन या ऑफलाइन या दोनो ही माध्यमों से परीक्षाएं या तो आयोजित हो चुकी हैं या आयोजन की योजना बना ली गयी है।

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