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अब मेडिकल की पढ़ाई जिला अस्पतालों में भी, पैरामेडिकल पाठ्यक्रम पूरे देश में एकसमान

नई दिल्ली। नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया है कि देश के सभी जिला अस्पतालों को मेडिकल पढ़ाई के लिए अपग्रेड किया जाएगा। इन अस्पतालों में मेडिकल की पढ़ाई होगी। इसके लिए विशेषज्ञों, योग्य शिक्षकों और पैसे की कमी नहीं होगी। चिकित्सा सेवा संस्थान और अस्पताल दोनों को काम करने से पहले मंजूरी लेनी होगी।

यहां एमबीबीएस, नर्सिंग व दंत चिकित्सा के अलावा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी ट्रेनिंग दी जाएगी।प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में डाक्टरों की कमी से निपटने को जनरल डयूटी असिस्टेंट, इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन, बेसिक और प्रयोगशाला सहायक  से काम चलाया जाएगा।
इन्हें एक या दो वर्ष की अवधि के कौशल आधारित सर्टिफिकेट कोर्स करवाए जाएंगे। यहां मेडिसिन, डेंटल, नर्सिंग, आयुष, आदि के विशेषज्ञ रखे जाएंगे। इसका पाठ्यक्रम पूरे देश में एकसमान होगा।

रिटायरमेंट से पहले होगी शिक्षक की भर्ती
2022 के बाद पैराटीचर नहीं, सिर्फ नियमित शिक्षक रखे जाएंगे। केंद्र और राज्य खाली शिक्षकों के पदों को भरने की योजना बनाएंगे। हर पांच साल बाद इसका रिव्यू होगा कि कुल कितने शिक्षकों की जरूरत है, उसके आधार उनकी नियुक्ति व ट्रेनिंग का काम होगा। रिटायरमेंट से पहले खाली होने वाले पद पर शिक्षक की नियुक्ति हो जाएगी।

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पूर्व छात्र और स्थानीय सहभागिता
पूर्व छात्र संस्थान की कमियों से अच्छे से वाकिफ होंगे। स्थानीय लोग सुरक्षा, सफाई आदि में सहयोग करेंगे। पूर्व छात्रों का स्थानीय लोगों से पहले से परिचय होता है। ऐसे में जब दोनों मिलकर साथ आएंगे तो बदलाव तो दिखेगा ही।

स्थानीय बाजार को भी जोड़ा जाएगा
बोर्ड परीक्षा और कॉलेज डिग्री लेने के बाद मार्केट में किस विषय की मांग रहेगी, क्या कोर्स सबसे अच्छा विकल्प है, इसकी जानकारी शिक्षण संस्थानों और स्थानीय उद्योगों के सामंजस्य से आसानी से उपलब्ध होगी। वे छात्रों को रोजगार से जोड़ने में सहयोग के साथ आर्थिक मदद भी देंगे।

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