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भारत में खुलेंगे विदेशी विवि, उच्च शिक्षा व रोजगार के अवसर होंगे पैदा

भोपाल। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 34 साल बाद लागू होगी। इसे लेकर केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। नई शिक्षा नीति में कई बदलाव किए गए हैं। इनमें स्कूल के बस्ते, प्री-प्राइमरी कक्षाओं से लेकर बोर्ड परीक्षाओं के रिपोर्ट कार्ड, यूजी एडमिशन आदि शामिल हैं। इस नीति के तहत स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षा को इसके दायरे में लिया गया है। नई नीति के तहत भारत में विदेशी विवि भी खुलेंगे। इससे उच्च शिक्षा व रोजगार के अवसर पैदा होंगे। भोपाल के शिक्षाविद् नई शिक्षा नीति को बेहतर बता रहे हैं, जो भविष्य में नए आयाम स्थापित कर देगी।

भविष्य में अच्छे परिणाम मिलेंगे

नई शिक्षा नीति में जीडीपी का छह प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च करने की पहल अच्छी है। सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक से नियम बनेंगे। साथ ही वोकेशनल शिक्षा पर भी जोर दिया गया है। स्कूल स्तर पर भी सेमेस्टर सिस्टम लागू होगा और अंग्रेजी को एक विषय के रूप में शामिल किया गया है। इसमें आने वाले समय में कठिनाई जरूर होगी, लेकिन भविष्य में अच्छे परिणाम भी मिलेंगे। विदेशी विवि भारत में खुल सकेंगे। इससे भारतीय विवि को कड़ी प्रतिस्पर्धा करना होगी।

राधावल्लभ शर्मा, पूर्व अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा

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मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा अच्छी पहल

नई शिक्षा नीति में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में किया जाना अच्छी पहल की गई है। नई शिक्षा नीति में मल्टीपल एग्जिट के विकल्प के साथ स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश का अवसर मिलेगा। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर और रोजगार उत्पन्न होंगे, क्योंकि विश्व के शीर्ष विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति दी जाएगी।

कैलाश त्यागी, प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय प्राध्यापक संघ

बस्ते का बोझ करना सबसे बेहतर

नई शिक्षा नीति इसमें डिजिटल शिक्षा एवं शिक्षा में तकनीक का उपयोग मुख्य है। प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में दी जाना एवं छात्रों के बस्ते का बोझ करने की पहल सबसे बेहतर है। विज्ञान, कला, वाणिज्य एवं व्यावसायिक शिक्षा विषयों में अंतर न कर विद्यार्थियों को मनपसंद विषय चुनने की आजादी भी इस शिक्षा नीति से मिलेगी। यही इसकी अच्छाई भी है। स्कूली शिक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त करना बड़ा एवं प्रतिगामी कदम है।

आनंद शर्मा, प्रांतीय महासचिव प्राध्यापक संघ

एकल प्राधिकरण संपूर्ण उच्च शिक्षा प्रणाली को नियंत्रित करेगा

नई शिक्षा नीति देश की शिक्षा व्यवस्था में कई सारे बदलाव ला रही है। इनमें से कुछ बदलाव सकारात्मक देखने को मिलते हैं। जैसे एकल प्राधिकरण संपूर्ण उच्च शिक्षा प्रणाली को नियंत्रित करेगा व मान्यता का समान स्तर, पाठ्यक्रम को घटा देना, व्यावहारिक और अनुप्रयोग आधारित ज्ञान पर ध्यान देना। ये सभी बेहतर शिक्षा के परिदृश्य हैं, पर कुछ नए नियमों के अनुसार चार साल का स्नातक कर दिया गया है व बारहवीं कक्षा को हटा दिया गया या जिससे स्नातक की डिग्री पर अधिक बोझ पड़ सकता है। कॉलेज संगीत, भौतिकी, मानविकी जैसे सभी धाराओं के अधिक संकायों को नियुक्त करने के लिए बाध्य होगा, क्योंकि विषय संयोजन में वृद्धि हुई है।

– डॉ. डालिमा परवानी, प्रोफेसर

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