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एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन साइंस एंड डेवलपमेंट, लखनऊ ने आयोजित किया वेबिनार

लखनऊ :
एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ ह्यूमन साइंस एंड डेवलपमेंट, लखनऊ के बाल विकास एवं महिला प्रशिक्षण विभाग द्वारा ‘अवेयरनेस ऑन माइंड बॉडी एंड मैडिटेशन’ पर 22 नवंबर 2020 को वेबिनार आयोजित किया गया। वेबिनार का आयोजन संस्थान के निदेशक प्रो. उदय प्रताप सिंह एवं विभागाध्यक्षा डॉ नीतिका श्रीवास्तव द्वारा किया गया। अतिथि वक्ता प्रजापति ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय गोमतीनगर लखनऊ की बी. के. राधा एवं बी. के. स्वर्णलता थीं। वेबिनार का संचालन डॉ गौरव मिश्रा द्वारा किया गया।

मैडिटेशन का उद्देश्य मानव को समस्याओं से मुक्त करना –

वेबिनार स्वागत वक्तव्य डॉ नीतिका श्रीवास्तव ने दिया। इन्होने मैडिटेशन के उद्देश्य पर चर्चा की एवं स्वास्थ्य के अलग-अलग पह्लुओं जैसे मानसिक, शरीरिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक के बारे में बताया। डॉ नीतिका ने बताया कि मैडिटेशन का उद्देश्य मानव को समस्याओं से मुक्त करना है साथ ही ये हमारी सहन शक्ति बढ़ाने एवं समाज के साथ सामंजस्य बिठाने में मदद करता है।

विचारों को किस तरह सकरात्मक एवं रचनात्मक बनाएं –

अतिथि वक्ता बी. के. राधा जो की वरिष्ट राजयोग शिक्षक रहीं, उन्होंने राजयोग के बारे में बताया की बीमारियों से मुक्ति दिलाने में राजयोग कारगर है। साथ ही ये मस्तिस्क को मजबूत करता है। इन्होने बताया की विचारों की गुणवत्ता हमारे आतंरिक व्यक्तित्व को निर्धारित करती है। राजयोग से हम दूसरों से बदले की भावना एवं चिड़चिड़े स्वभाव से मुक्त हो सकते हैं। विचार मुख्यता चार प्रकार के होते हैं – सकारात्मक, नकारात्मक, निरर्थक, एवं भूतकालिक घटनाओं से सम्बंधित विचार। इनमें से 80% विचार भूतकालिक घटनाओं से सम्बंधित एवं निरर्थक होते हैं जो माइंड में चलते रहते हैं जबकि 15% विचार भविष्य से सम्बंधित होते हैं, 5% विचार केवल वर्तमान से सम्बंधित होते हैं। राजयोग हमें ये सिखाता है की वर्तमान से सम्बंधित विचारों को किस तरह सकरात्मक एवं रचनात्मक बनाया जा सकता है जिससे इच्छा शक्ति को मजबूत किया जा सकता है।

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मस्तिस्क द्वारा संचालित होता है शरीर –

कार्यक्रम की मुख्या वक्ता बी. के. स्वर्णलता ने बताया की सारी जिंदगी हम केवल शरीर के बारे में सोचते रहते हैं जबकि मस्तिस्क द्वारा शरीर संचालित होता है इसलिए मस्तिस्क भी उतना ही महत्वपूर्ण है, हमे इसके बारे में भी सोचना चाहिए। विज्ञान ये बताता है की बीमारियाँ साइको – सोमेटिक होती हैं अर्थात मन का प्रभाव तन पर पड़ता है। आत्मा के तीन भाग होते हैं मस्तिस्क, बुद्धि एवं संस्कार। मस्तिस्क से सोचना, बुद्धि से समझना एवं संस्कार से कार्य को क्रियान्वित करना चाहिए।

आत्मा का पहला गुण ज्ञान होता है –

मैडिटेशन के माध्यम से हम नकारात्मक विचारों को नियंत्रित एवं उन्हें सकारात्मक क्रियाओं की तरफ मोड़ सकते हैं साथ ही तनाव को दूर करके हम समाज के लिए कुछ अच्छा कार्य कर सकते हैं। दूसरों के प्रति नकारात्मक विचारों को न फैलाना भी माइंड को सकारात्मक रखने का एक तरीका है। दूसरों के दर्द को समझकर उसे दूर करना एवं खुद दर्द में नही आना ये मैडिटेशन से ही संभव है। आत्मा का पहला गुण ज्ञान होता है, और अच्छे विचार भी उसी से आते हैं। उन्होंने आत्मा के ज्ञान, आनंद, प्रेम ख़ुशी, शुद्धता जैसे गुणों के बारे में बताया।

लोग समझ गए तो यही कार्यक्रम की सफलता होगी –

संस्था के निदेशक प्रो. उदय प्रताप सिंह ने अपने वक्तव्य में बताया की बी.के. राधा एवं बी. के. स्वर्णलता का वक्तव्य एक प्रकार से देववाणी है जिसे यदि लोग समझ गए तो यही कार्यक्रम की सफलता है। मन एवं आत्मा को समझने से हम शरीर की बीमारियों को दूर कर पाएंगे क्योकि शरीर एक हार्डवेयर की तरह है जो आत्मा द्वारा नियंत्रित होता है। कर्मेन्द्रियाँ हों या ज्ञानेन्द्रियाँ इनको साधने वाला साधक मन ही है जिसका नियंत्रण हम बुद्धि से करते हैं और इसकी व्याख्या अतिथि वक्ताओं ने अच्छी तरह से की है।

कार्यक्रम में ये रहें मौजूद –

कार्यक्रम में अनीता सिंह, डॉ. दीप शिखा अवस्थी, डॉ विभा बाजपेयी, प्रीती गुप्ता, साधना वर्मा, मंजुलिका गौतम, सुरभि वर्मा, सारा हक, पूजा शाह, सौम्यजीत, शोभित वर्मा आदि लोग मौजूद रहे ।

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