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एआईएचएसडी ने आयोजित की जनरल बॉडी मीटिंग, विभिन्न विषयों पर हुयी चर्चा

लखनऊ :
एशियन इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूमन साइंस एंड डेवलोपमेन्ट (एआईएचएसडी) ने 4 दिसंबर को संस्थान के मुख्य आफिस में जनरल बॉडी मीटिंग एवं एग्जेक्युटिव मेंबर्स मीटिंग 2020 आयोजित की। मीटिंग में संस्थान के निदेशक प्रो. उदय प्रताप सिंह ने संस्थान की विस्तार से वार्षिक प्रोग्रेस रिपोर्ट प्रस्तुत की। मीटिंग के दूसरे एजेंडे में दो नए एग्जेक्युटिव मेंबर्स डॉ रंजीत सिंह एवं डॉ अंजलि चौहान जोड़े गए।

लखनवी चिकनकारी एवं लखनवी डिशेस के बारे में बताया –

एआईएचएसडी मीटिंग में प्रेसीडेंट नवाब लखनऊ, मीर जफर अब्दुल्ला ने सुझाव दिया कि सेव ह्यूमैनिटी प्रोजेक्ट को किस तरह से आगे बढ़ाया जाए। आपने लखनऊ तहजीब के बारे में और लखनवी इतिहास के बारे में बताया। लखनवी चिकनकारी एवं लखनवी डिशेस के बारे में बताया। लखनवी तहजीब में ‘कल्चर ऑफ अवध’ लेक्चर सीरीज शुरू करने पर आम सहमति बनी. डॉ. मासियत रिजवी ने कंपोजिट कल्चर में लेक्चर करने के बारे में सुझाव दिया।

एआईएचएसडी कार्यक्रम में ये रहे शामिल –

मीटिंग में डॉ. डी. आर. वर्मा, डॉ. सुमन गोसाई, डॉ नीतू सिंह, डॉ. ऐश्वर्या अवस्थी, डॉ. विजय कुमार, डॉ. विभा बाजपेई, डॉ. मासियत रिजवी, डॉ. नीतिका श्रीवास्तव, डॉ. अनूप बाजपेई, डॉ. गौरव मिश्रा, शोभित वर्मा, नीतिका श्रीवास्तव, रुपाली सिंह आदि लोग मौजूद रहे। वोट ऑफ थैंक्स प्रेसीडेंट नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला ने दिया।

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एमसीयू मे ‘ऑनलाइन शिक्षा : दशा और दिशा’ विषय पर शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव

भोपाल :
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के सभी संकाय सदस्यों ने 4 दिसंबर को ‘ऑनलाइन शिक्षा: दशा और दिशा’ विषय पर मंथन किया। इसमें विश्वविद्यालय के रीवा और खंडवा परिसर के संकाय सदस्य भी शामिल रहे। कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण अध्ययन-अध्यापन ऑनलाइन मोड में है। यह नवाचार है। समय-समय पर इसकी समीक्षा आवश्यक है। ऑनलाइन शिक्षा का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों को मिले, इसके लिए निरंतर मूल्यांकन और नवाचार आवश्यक है। कुलपति ने कहा कि जल्द ही शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा और ऑनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग करने की प्रक्रिया पर ई-बुक प्रकाशित की जाएगी।

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यूजीसी ने एमफिल और पीएचडी स्टूडेंट्स के शोध प्रबंध जमा करने का समय बढ़ाया

नई दिल्ली :
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने रिसर्च स्कॉलर्स को एमफिल और पीएचडी के शोध प्रबंध जमा करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय दिया है। ऑफिशियल वेबसाइट, ugc.ac.in पर जारी नोटिस के अनुसार एमफिल और पीएचडी के स्टूडेंट्स द्वारा अपने शोध प्रबंध को जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून, 2021 तक बढ़ा दी गई है।

इन्हे दिया गया छह माह का एक्सटेंशन –

यूजीसी ने अप्रैल में कोविड-19 महामारी के चलते विश्वविद्यालयों के लिए परीक्षा और एकेडमिक कैलेंडर पर दिशानिर्देश जारी किए थे। एमफिल और पीएचडी के स्टूडेंट्स को, जिन्हें 30 जून 2020 तक अपने शोध प्रबंध प्रस्तुत करने थे, उन्हें छह माह का एक्सटेंशन दिया गया था।

पीएचडी की फेलोशिप का कार्यकाल पांच साल तक –

आधिकारिक वेबसाइट पर नया नोटिस जारी करते हुए यूजीसी ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण, पिछले कई महीनों से विश्वविद्यालय बंद हैं। इसलिए, स्टूडेंट्स प्रयोगशाला में अपने अनुसंधान / प्रयोगों का संचालन करने में सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, स्टूडेंट्स पुस्तकालय सेवाओं का भी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

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