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एमसीयू मे ‘ऑनलाइन शिक्षा : दशा और दिशा’ विषय पर शिक्षकों ने साझा किए अपने अनुभव

भोपाल :
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) के सभी संकाय सदस्यों ने 4 दिसंबर को ‘ऑनलाइन शिक्षा: दशा और दिशा’ विषय पर मंथन किया। इसमें विश्वविद्यालय के रीवा और खंडवा परिसर के संकाय सदस्य भी शामिल रहे। कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण अध्ययन-अध्यापन ऑनलाइन मोड में है। यह नवाचार है। समय-समय पर इसकी समीक्षा आवश्यक है। ऑनलाइन शिक्षा का अधिकतम लाभ विद्यार्थियों को मिले, इसके लिए निरंतर मूल्यांकन और नवाचार आवश्यक है। कुलपति ने कहा कि जल्द ही शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा और ऑनलाइन प्लेटफार्म का उपयोग करने की प्रक्रिया पर ई-बुक प्रकाशित की जाएगी।

विमर्श में शिक्षकों ने नवाचारों को किया साझा –

विश्वविद्यालय में आयोजित ऑनलाइन शिक्षा पर मंथन में शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए। शिक्षकों ने बताया कि उन्हें क्या कठिनाई आ रही थी, जिनका समाधान उन्होंने किस तरह किया। इस विमर्श में शिक्षकों ने अपनी ओर से किये जा रहे नवाचारों को साझा किया। शिक्षकों ने बताया कि वे नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी, मूक, स्वयं, स्वयंप्रभा जैसे भारत सरकार के डिजिटल नवाचारों का उपयोग कर रहे हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को ई-कंटेंट के रूप में वीडियो सामग्री, टेक्स्ट, पीडीएफ और नोट्स उपलब्ध करा रहे हैं। विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित संदर्भ सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।

प्राध्यापकों के सहयोग से ऑनलाइन कंटेंट की होगी व्यवस्था –

शिक्षक ऑनलाइन क्लास के लिए गूगल मीट, गूगल क्लास रूम, गूगल वेबसाइट, गूगल फॉर्म, मूडल इत्यादि प्लेटफार्म का उपयोग कर रहे हैं। प्रैक्टिकल गतिविधियों में विद्यार्थियों को ऑनलाइन असाइनमेंट दिए जा रहे हैं। विद्यार्थियों ने इस बीच में ई-न्यूज़ पेपर, न्यूज़ प्रोग्राम, लघु फ़िल्म सहित अन्य अभ्यास कार्य किये हैं। इस अवसर पर शिक्षकों ने ऑनलाइन शिक्षा में आ रही समस्याओं को भी बताया। इस पर कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने समस्याओं के समाधान भी सुझाये हैं।उन्होंने तकनीकी बाधाएं दूर करने की बात भी कही। कुलपति ने कहा कि हम जल्द ही विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय, अन्य संस्थाओं और प्राध्यापकों के सहयोग से ऑनलाइन कंटेंट की व्यवस्था भी बनाएंगे।

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शिक्षा मंत्री ने नई शिक्षा नीति में आरक्षण खत्म होने के सवाल पर जारी किया बयान

नई दिल्ली :
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी व दिव्यांग श्रेणियों के आरक्षण नियमों को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने बयान जारी किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने सीपीआई-एम के महासचिव सीताराम येचुरी के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाल ही में भेजे गए पत्र पर अपना बयान जारी किया है। प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने पत्र के माध्यम से सीताराम येचुरी ने सवाल उठाया था कि नई शिक्षा नीति में दाखिले या टीचिंग व नॉन-टीचिंग रिक्रूटमेंट में आरक्षण नीतियों का कहीं जिक्र नहीं किया गया है। क्या सरकार नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से आरक्षण खत्म करना चाहती है?

शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी के बाद से कई परीक्षा हुयी आयोजित –

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने एक पत्र के द्वारा सीताराम येचुरी के प्रश्नों का जवाब दिया है। शिक्षा मंत्री ने अपने जवाब में लिखा है कि नई शिक्षा नीति 2020 को मंजूरी मिलने के बाद से जेईई, नीट, यूजीसी नेट, इग्नू आदि कई परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं। कई शैक्षणिक संस्थानों में भर्ती प्रक्रियाएं भी हुईं। लेकिन, हमें कहीं से भी आरक्षण नियमों के भंग होने की किसी प्रकार की शिकायत नहीं मिली है। ऐसे में, एनईपी की घोषणा के चार से पांच महीने बीत जाने के बाद बिना किसी तथ्य के आधार पर इस तरह का सवाल उठाना फिजूल है।

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