Medical College

इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस के विद्यार्थियों ने स्किम्स प्रशासन के खिलाफ किया प्रदर्शन

नई दिल्ली :
शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस सौरा के विद्यार्थियों ने क्लीनिकल कक्षाएं शुरू न करने के विरोध में शुक्रवार को प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना था कि इससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है। स्किम्स प्रागंण में एकत्रित हुए एमबीबीएस के ढाई सौ विद्यार्थीयों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि छह महीनों से एक भी मेडिकल क्लीनिकल कक्षा नहीं लगी। यही नहीं होस्टलों से कोविड स्टाफ को भी बाहर नहीं किया गया है। विद्यार्थियों का कहना था कि उन्होंने होस्टलों का किराया पहले ही दे दिया है लेकिन उनकी जगह कोविड 19 की डयूटी दे रहे स्टाफ को होस्टलों में रखा गया है।

अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया हुआ है और किसी भी विद्यार्थी की क्लीनिकल डयूटी नहीं लगाई जा रही है। एक महीने पहले कक्षाएं शुरू हो गई थी। अब ऐसे में प्रशासन का रवैया सही नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन से वे कई बार गुहार लगा चुके हैं कि उनके होस्टलों के कमरे खाली करवाए जाएं लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। इससे सभी विद्यार्थियों को परेशानी आ रही है।

कोविड स्टाफ के संपर्क में आए और संक्रमित हो गए –

एमबीबीएस विद्यार्थियों का कहना था कि मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल के इस रवैये के कारण आठ विद्यार्थी अभी तक कोविड 19 से संक्रमित हो चुके हैं। वे कोविड स्टाफ के संपर्क में आए और संक्रमित हो गए। यह बहुत ही चिंताजनक है और विद्यार्थियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला है।

क्लीनिकल कक्षाएं नहीं लगी तो पढ़ाई में होगा नुकसान –

विरोध प्रदर्शन करते हुए छात्रों ने कहा इस समय कक्षाएं सिर्फ वार्ड में ही चल रही है। ऐसे में अगर क्लीनिकल कक्षाएं नहीं लगी तो उन्हें पढ़ाई में बहुत नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस रवैये के कारण करीब पांच सौ विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।

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पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में चैसकॉन 2020 के दूसरे दिन वैज्ञानिकों ने साझा किए सफलता के मंत्र

नई दिल्ली :
पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में चैसकॉन 2020 के दूसरे दिन देश- विदेश के वैज्ञानिकों ने अपनी सफलता के राज साझा किए। चंडीगढ़ रीजन इनोवेशन एंड नॉलेज क्लस्टर (क्रिक) के सहयोग से पंजाब यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन माध्यम से चंडीगढ़ साइंस कांग्रेस चैसकॉन का आयोजन कर रही है। कार्यक्रम में दूसरे दिन का विषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी रहा, जिसमें नवाचार मेक इन इंडिया के युग में कैसे कार्य किया जाए, इस बात को मुख्य रूप से केंद्रीत किया गया।

विभिन्न मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां हुईं –

चैसकॉन 2020 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पंजाब विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. विवेक रंजन सिन्हा थे। कार्यक्रम में फार्मास्युटिकल साइंसेज के क्षेत्र में प्रख्यात वैज्ञानिकों द्वारा विशेषज्ञ वार्ता की एक श्रृंखला आयोजित की गई थी। यूआइपीएस चेयरपर्सन प्रो. इंदु पाल कौर ने कार्यक्रम के बारे में सभी जानकारी दी। उन्हाेंने फार्मा क्षेत्र में वैज्ञानिकों द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को सबके सामने रखा। इस अवसर पर विभिन्न मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां हुईं।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया –

प्रो. विवेक रंजन सिन्हा ने दवाओं के लागत प्रभावी विकास के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। पहली विशेषज्ञ वार्ता प्रो. संजय गर्ग, फार्मास्युटिकल साइंस यूनिसा क्लिनिकल एंड हेल्थ साइंसेज दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय (यूनिसा) और सेंटर फॉर कैंसर डायग्नोस्टिक्स एंड थेरेप्यूटिक्स (सीसीडीटी) के निदेशक ने शुरू की। उन्होंने वर्तमान स्वास्थ्य परिदृश्य के मद्देनजर आधुनिक बनाम पारंपरिक दवाओं का तुलनात्मक अवलोकन किया और ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के सामान्य लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दोनों को सम्मिश्रित करने पर जोर दिया।

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