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प्रोफेसरों, डॉक्टरों, अभिभावकों ने स्कूल खोलने की मांग को लेकर लिखा ये ओपन लेटर, दिए ये सुझाव

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के चलते पिछले डेढ़ सालों से स्कूलों में छात्रों की ऑनलाइन क्लास ही चल रही है। वहीं अब आईआईटी प्रोफेसरों, डॉक्टरों, अभिभावकों ने 3 राज्यों के सीएम को ओपन लेटर जारी कर स्कूलों को फिर से खोलने की मांग की है।
आईआईटी मुंबई के प्रोफ़ेसर भास्करन रमन, जो कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग में काम करते हैं, ने महाराष्ट्र दिल्ली और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों को एक ओपन लेटर लिखा है। यह लेटर केवल प्रोफ़ेसर ही नहीं बल्कि उनके कई सहयोगियों द्वारा “आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी दिल्ली में, विभिन्न डॉक्टरों, पेशेवरों और महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक राज्यों के संबंधित माता-पिता द्वारा जारी किया गया था”। यह पत्र में इस बात के सबूत साझा किया गया है कि स्कूलों को लगभग 50 डॉक्टरों, बाल रोग विशेषज्ञों, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, वकीलों, अर्थशास्त्रियों सहित जीन द्रेज, रितिक खेड़ा, चंद्रकांत लहरिया, गौतम मेनन और भास्कर रमन की मंजूरी के साथ फिर से खोला जाना चाहिए।

जाने पत्र में क्या लिखा गया है:-

1:- भारत में पिछले 16 महीनों से स्कूल बड़े पैमाने पर बंद है। सीखने और विकास के नुकसान के मामले में स्कूल बंद होने की लागत बढ़ रही है, जबकि वैज्ञानिक प्रमाण इंगित करते हैं कि सुरक्षा उपायों के साथ फिर से खोलना संभव है।

2:- जैसा कि यह पत्र लिखा जा रहा है, दुनिया भर के लगभग 170 देशों में स्कूल आंशिक रूप से यह पूरी तरह से खुले हैं। कुछ देशों, जैसे फ्रांस और स्वीडन ने महामारी के दौरान स्कूलों को बंद नहीं किया। जुलाई 2021 में यूनिसेफ और यूनेस्को ने कहा कि स्कूल बंद होने वाले अंतिम और सबसे पहले खुलने वाले निर्णय होने चाहिए। इस बात के प्रमाण हैं कि पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालय सबसे कम जोखिम में है और वृद्धावस्था समूहों के लिए स्कूलों से पहले उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

3:- वयस्कों के टीकाकरण में कई और महीने लग सकते हैं क्योंकि दिल्ली में केवल 13 फ़ीसदी आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है व महाराष्ट्र और कर्नाटक में 7% आबादी को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। भारत में बच्चों के लिए टीके विकसित किए जा रहे हैं, यूके जैसे देशों ने छोटे बच्चों के लिए सार्वभौमिक टीकाकरण के खिलाफ फैसला लिया है और दुनिया में कहीं भी 12 साल से कम उम्र के बच्चों का टीकाकरण नहीं किया जा रहा है।

4:- भारत में लंबे समय तक स्कूल बंद रहने की लागत को देखते हुए, स्कूल खोलने के लिए बच्चों का टीकाकरण शर्त नहीं हो सकती। इसके अलावा शून्य केस होगा इसकी संभावना नहीं है इसलिए कोविड-19 से बचने के उपायों के साथ जोखिमों को दूर करने के लिए प्रयास होना चाहिए।

5:- इस पत्र में कहा गया रातों-रात स्कूल नहीं खोले जा सकते। इसके लिए सभी स्तरों पर विशेष रूप से स्थानीय परिस्थितियों के संबंध में सावधानीपूर्वक योजना बनाने की आवश्यकता होगी।

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निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार करने की दी सलाह:-

1- अपने राज्य में आंशिक रूप से अभी और पूरी तरह निकट भविष्य में स्कूल खोलने की योजना बनाने के लिए तत्काल आधार पर प्रासंगिक विशेषज्ञों के साथ एक टास्क फोर्स का गठन करें।

2- जहां सकारात्मकता दर कम है, वहां कुछ सावधानियों के साथ स्कूल खोलने की योजना बनाई जाए ( डॉ० गुलेरिया ने 19 जुलाई 2021 को यह सुझाव दिया था )।

3- माध्यमिक विद्यालयों से पहले पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक खोलने का पता लगाएं ( 20 जुलाई 2021 को, ICMR ने पहले प्राथमिक विद्यालय खोलने का सुझाव दिया )।

4- स्कूल के कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर टीके लगवाए जाएं और स्वास्थ्य कर्मियों और आगे की पढ़ाई के लिए विदेश जाने वाले छात्रों के समान, खुराक के बीच के अंतर को कम किया जाए।

5- स्कूलों को फिर से खोलने के लिए विस्तृत सिफारिशें लैंसेट कोविड-19 आयोग इंडिया टास्क फोर्स, एसआरसीसी चिल्ड्रन हॉस्पिटल और कई अन्य संस्थानों और व्यक्तिगत विशेषज्ञों द्वारा की गई हैं।

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