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प्राइवेट स्कूलों के संगठन ने कक्षा 6 से 8 तक के लिए स्कूलों को खोलने के लिए की मांग

राष्ट्रीय राजधानी के कई निजी स्कूल मांग कर रहे हैं कि कक्षा 6 से 8 के लिए जल्द से जल्द शारीरिक कक्षाओं की अनुमति दी जाए।

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी के कई निजी स्कूल मांग कर रहे हैं कि कक्षा 6 से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए भी विद्यालय जल्द से जल्द खोले जाएं। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन (डीएसपीएसएमए) ने कहा है कि अगर 24 सितंबर तक कक्षा 6 से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल नहीं खोले गए तो मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

डीएसपीएसएमए के प्रमुख आरसी जैन ने कहा, “ कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खोल दिए गए हैं और अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। निजी स्कूल बस सेवाएं देना शुरू कर दें तो उपस्थिति में और सुधार होगा, क्योंकि सभी स्कूल बस सेवा नहीं दे रहे हैं।’

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उन्होंने एक बयान में कहा, “ अब कक्षा छठी से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूलों को खोलने में क्या हर्ज है? हम इस पर सरकार के आदेश का इंतजार कर रहे हैं और 24 सितंबर तक इन कक्षाओं के लिए स्कूलों को खोलने का फैसला नहीं हुआ तो मुख्यमंत्री के आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करेंगे।”

राष्ट्रीय राजधानी में कोविड -19 की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार के बाद, दिल्ली सरकार ने एक सितंबर से कक्षा नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए स्कूल तथा कॉलेज और कोचिंग संस्थान खोल दिए हैं।

हरियाणा में स्कूलों, विश्वविद्यालय के सिलेबस में हुआ बदलाव

हरियाणा सरकार पौराणिक नदी सरस्वती के इतिहास को स्कूलों तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सिलेबस में शामिल करेगी। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पहले हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड (एचएसएचडीबी) ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) में सेंटर फॉर बी आर आंबेडकर स्टडीज में सहायक निदेशक डॉ. प्रीतम सिंह की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय ‘सरस्वती नदी सिलेबस समिति’ का गठन किया, जिसे कक्षा छह से लेकर दसवीं तक के लिए सिलेबस तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

बाद में, केयू के कुलपति डॉ. सोम नाथ सचदेवा ने विश्वविद्यालय के सरस्वती रिवर रिसर्च ऐंड एक्सिलेंस सेंटर में निदेशक प्रोफेसर ए आर चौधरी की अध्यक्षता में एक अन्य समिति बनाई, जिसे विश्वविद्यालय के सिलेबस तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया. डॉ. प्रीतम सिंह इस समिति के सह अध्यक्ष हैं। अधिकारी ने बताया कि इस विचार के पीछे उद्देश्य है युवाओं को प्राचीन नदी के इतिहास के बारे में जागरूक करना।

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