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सीबीएसई का बड़ा फैसला, कोरोना की वजह से माता-पिता को खोने वाले छात्रों को नहीं देना होगा एग्जाम फीस

सीबीएसई ने उन छात्रों से बोर्ड परीक्षा की फीस नहीं लेने का फैसला किया है, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता पिता को खो दिया है।

नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई की ओर से बड़ा फैसला लिया गया है। सीबीएसई ने उन छात्रों से बोर्ड परीक्षा की फीस नहीं लेने का फैसला किया है जिन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान अपने माता पिता को खो दिया है। कोरोना वायरस की वजह से प्रभावित हुए व्यवसाय और नौकरियों को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई बोर्ड में यह फैसला लिया है।

इस संबंध में सीबीएसई की ओर से एक नोटिफिकेशन जारी की गई है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी ने सब पर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। ऐसे में छात्रों के करियर में कोई रुकावट ना आए इसलिए बोर्ड इस तरह के फैसले ले रहा है। छात्रों पर पड़े कोरोना वायरस के प्रभाव को ध्‍यान में रखते हुए सीबीएसई बोर्ड ने छात्रों को राहत देने का काम किया है।

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एग्जाम फीस

फिलहाल स्कूलों को 10वीं और 12वीं कक्षा के अभ्यर्थियों की सूची (एलओसी) 30 सितंबर तक बिना लेट फीस और 9 अक्टूबर तक लेट फीस के साथ भेजने को कहा गया है। बता दें कि आवेदन करने के लिए छात्रों को पहले के नियमों के अनुसार बोर्ड परीक्षा शुल्क का भुगतान करना होगा। गौरतलब है कि पांच विषयों के लिए प्रति उम्मीदवार 1500 रुपए और 1200 रुपए तक का सामान्य शुल्क जमा करना होता है।

सिलेबस में बदलाव

सीबीएसई ने इस साल सिलेबस को दो भागों में विभाजित कर दिया है। जिनकी परीक्षा दो टर्म में आयोजित की जाएगी। नवंबर-दिसंबर में होने वाली टर्म- I परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे जिनमें केस-आधारित एमसीक्यूं और अभिकथन-तर्क प्रकार एमसीक्यू शामिल हैं। यह परीक्षा 90 मिनट की होगी।

वहीं टर्म II में केस-आधारित, स्थिति-आधारित, ओपन-एंडेड प्रश्नों के साथ-साथ लघु और दीर्घ उत्तर दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। यह पेपर दो घंटे के लिए आयोजित किया जाएगा। हालांकि, अगर कोविड -19 महामारी की स्थिति सामान्य नहीं होती है, तो मार्च में टर्म II की परीक्षा 90 मिनट की होगी, जिसमें एमसीक्यू-आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे।

परीक्षा नियंत्रक ने दी जानकारी

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा, “बोर्ड द्वारा उन छात्रों से न तो परीक्षा शुल्क और न ही पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा जिन्होंने माता-पिता दोनों या परिवार की देखभाल करने वाले अभिभावक अथवा कानूनी अभिभावक या दत्तक माता-पिता को कोविड-19 के कारण खो दिया है।”

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