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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला, असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं

अब पीजी डिग्री वाले उम्मीदवार जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पात्र होंगे। यूजीसी जल्द ही इस फैसले के संबंध में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक परिपत्र जारी करेगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सभी खाली सीटों को जल्दी भरने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर आवेदन करने के लिए अनिवार्य पीएचडी डिग्री को लेकर बड़ा ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री ने कहा है कि कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि यह अनिवार्यता केवल एक साल यानी कि इसी साल 2021 में होने वाली भर्तियों के लिए खत्म की गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि इस साल पीएचडी अनिवार्यता के लिए रोक लगी है, लेकिन इसे रद्द नहीं किया गया है। उम्मीदवारों को यह राहत इसलिए दी गई है कि, जिससे यूनिवर्सिटी में खाली पड़े शिक्षकों की भर्ती की जा सके।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि,देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायक प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य है। लेकिन अब इस मानदंड को शिक्षा मंत्रालय द्वारा सिर्फ इसी सत्र के लिए हटा दिया गया है ताकि रिक्त पदों को समय पर भरा जा सके और संकाय / प्रोफेसरों की संभावित कमी के कारण शिक्षा प्रभावित न हो। दरअसल, हमें उन उम्मीदवारों से बहुत सारे अनुरोध प्राप्त हो रहे थे जो पद के लिए आवेदन करना चाहते थे, लेकिन पीएचडी पूरा करने में असमर्थ थे। इसलिए इस बाध्यता को महज इसी साल के लिए खत्म किया गया है।

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अब पीजी डिग्री वाले उम्मीदवार, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण की है, असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पात्र होंगे। यूजीसी जल्द ही इस फैसले के संबंध में सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक परिपत्र जारी करेगा। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को सभी खाली सीटों को जल्दी भरने में मदद मिलेगी।

बता दें कि पहले कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए नेट क्वालिफाई होना जरूरी था। लेकिन साल 2018 में, सरकार ने अनिवार्य किया था कि इस स्तर पर नौकरी पाने के लिए नेट के अलावा उम्मीदवारों की पीएचडी आवश्यक होगी। इस योजना को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग 2018 के नियमों के तहत लागू किया गया था। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए यह उपाय अपनाया गया था।

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