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रेलवे के स्कूलों में अब नहीं होगी नई नियुक्ति, होंगे दूसरे विद्यालयों में मर्ज

रेलवे अब अपने स्‍कूलों को बंद करने की तैयारी कर रहा है। रेलवे बोर्ड ने स्कूलों को सुव्यवस्थित करने के नाम पर बंद या मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बोर्ड ने फ‍िलहाल विद्यालयों में नई नियुक्ति और पदोन्नति पररोक लगा दी है।

नई दिल्ली। निजीकरण और आउटसोर्सिंग पर रेल कर्मचारियों का गुस्स यूं ही नहीं है। अब रेलवे के स्कूलों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। रेलवे बोर्ड ने स्कूलों को सुव्यवस्थित करने के नाम पर बंद या मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रेल कर्मचारियों के बच्‍चे कम होने पर बंद होंगे स्कूल या किये जाएंगे दूसरे स्कूलों में मर्ज

नई व्यवस्था के तहत रेल कर्मियों के बच्‍चे कम होने पर स्कूल बंद कर दिए जाएंगे या पास वाले रेलवे के दूसरे स्कूल में मर्ज कर दिए जाएंगे। स्कूलों के बंद या मर्ज होने की दशा पर रेलवे प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि छात्रों और अभिभाव कों को कोई दिक्कत न हो। हालांकि, जिन विद्यालयों में बच्‍चों की संख्या पर्याप्त है, वे चलते रहेंगे। संचालन के लिए रेलवे प्रशासन को रिपोर्ट देनी होगी। फिलहाल, बोर्ड ने विद्यालयों में नई नियुक्ति और पदोन्नति पर भी रोक लगा दी।

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चार नवंबर तक सभी विद्यालयों से मांगी गई रिपोर्ट

25 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित बैठक में सभी जोनल कार्यालयों को पत्र लिखकर चार नवंबर तक सभी विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी है। पूर्वोत्तर रेलव, उत्तर मध्य रेलवे में ज्यादातर हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट में बहुत से विद्यालयों में रेलकर्मियों के बच्‍चों की संख्या अपेक्षाकृत कम ही है। कुछ विद्यालयों में रेलकर्मियों के बच्‍चों की संख्या 50 फीसद से भी कम है। जबकि, कुछ विद्यालयों में लगभग फिफ्टी-फिफ्टी का अनुपात है। ऐसे में इन विद्यालयों के संचालन पर भी संशय है। इस स्थती में विद्यालयों को मर्ज करने की संभावना ज्यादा बढ़ गई है।

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