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मां ने बकरी पालकर चलाया घर का खर्च, टीचर ने भरी फीस… UPSC पास कर विशाल ने जीता सभी का दिल

UPSC Result 2021

नई दिल्ली : खाने को दो वक्त की रोटी भी नसिब नहीं होती थी, पिता की मौत के बाद घर की हालत संभालना मुश्किल था। मां ने बेहद गरीबी में विशाल को पढ़ाया। दो वक्‍त की रोटी के लिए बकरी व भैंस पालकर खर्च चलाया। ऐसी स्थिति में पढ़े विशाल कुशवाहा ने आज सभी को चौंका दिया। उन्हें UPSC 2021 में 484 वां रैंक प्राप्त हुआ है, यह मुकाम उन्‍होंने दूसरे ही एटेम्पट में हासिल किया।

विशाल कुशवाहा के पिता बिकाऊ प्रसाद कुशवाहा की मौत वर्ष 2008 में हो गयी थी। इसके बाद परिवार की स्थिति को उनकी मां ने संभाला। उनकी इस सफलता में उनके शिक्षक गौरीशंकर प्रसाद सिंह का भी बहुत बड़ा योगदान है। गौरीशंकर ने विशाल की शिक्षा के लिए पूरा साथ दिया। सातवीं कक्षा से ही, उन्‍होंने विशाल का दामन थामा और आर्थिक रूप से भी मदद करते रहे।

रोल मॉडल हैं विशाल
विशाल की इस सफलता पर केवल गांव को ही नहीं, बल्कि पूरे जिले को नाज है। ये अपने लोगों के बीच किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं। विशाल मुजफ्फरपुर जिले के मीरापुर प्रखंड के मकसूदपुर गांव के रहने वाले हैं। यूपीएससी क्लियर करने के बाद इनके घर पर बधाईयों का तांता लगा हुआ है।

पहली बार किया जिला टॉप
विशाल की मां रीना देवी बताती हैं कि गांव के ही सरकारी स्कूल से उनकी प्रारम्भिक शिक्षा हुई। इसके बाद RK हाई स्कूल छपरा से मैट्रिक की परीक्षा पास की, जिसमें वह जिला टॉपर बनें। इसके बाद LS कॉलेज से इंटर किया, फिर सुपर 30 में उनका चयन हुआ। IIT कानपुर से बीटेक करने के बाद रिलाइंस कंपनी में जॉब करने लगे। हालाकि उनका मन कुछ बड़ा करने को करता था, वे अपने इस मुकाम से खुश नहीं थे।

नहीं हारी ह‍िम्‍मत
फिर उनके शिक्षक गौरीशंकर प्रसाद सिंह ने उनका मार्गदर्शन किया औरह यूपीएससी की तैयारी की सलाह दी। इसके बाद वर्ष 2020 से उसने तैयारी शुरू की और पहली बार में उसे सफलता नहीं मिली। फिर भी उन्‍होंने ह‍िम्‍मत नहीं छोड़ा, परिजन और शिक्षक का साथ भी पूरा सपोर्ट मिला, जिसका परिणाम रहा कि उन्‍हें आज सफलता मिल ही गई।

सिर्फ तीन घंटे की नींद
उनकी बहन खुशबू और भाई राहुल बताते हैं कि विशाल पढ़ाई के लिए इतने सजग थे कि वे केवल तीन घंटे की नींद पूरी करते थे। नींद आती तो वे बिस्‍तर पर नहीं बल्कि दीवार से सटकर सो जाते। जबरन सोने के लिए कहने पर फिर भी बिछावन पर सोने नहीं जाते थे।

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