30 नवम्बर तक ले सकेंगे ऑनलाइन कोर्सेस मे एडमिशन, यूजीसी ने लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली :
यूजीसी ने विश्वविद्यालयों मे शैक्षणिक सत्र 2020-21 मे प्रवेश के लिये आवेदन की तिथि को 30 नवम्बर तक बढ़ा दिया है। अब छात्र ऑनलाइन कोर्सेस मे एडमिशन के लिए 30 नवम्बर तक सभी प्रक्रिया पूरी कर सकते है। इससे पहले एडमिशन के लिए अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गयी थी।
विश्वविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया को 30 अक्तूबर तक पूरा करना था –
साथ ही पोस्ट ग्रेजुएट में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यूजीसी ने केंद्र सरकार की ओर से चलाई जाने वाले ऑनलाइन छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) स्कीमों में आवेदन की समयसीमा भी बढ़ाकर 30 नवंबर तक की कर दी है। यूजीसी ने यह फैसला विश्वविद्यालयों की मांग के बाद लिया है। मालूम हो कि यूजीसी ने सितंबर अक्टूबर शैक्षणिक सत्र के लिए जो अकादमिक कैलेंडर जारी किया था उसके तहत सभी विश्वविद्यालयों को प्रवेश प्रक्रिया को 30 अक्तूबर तक पूरा करना था। कुछ विश्वविद्यालयों में यह प्रक्रिया देर से शुरू हुई थी। इन विश्वविद्यालयों ने समयसीमा को बढ़ाने की मांग यूजीसी से की थी। इसी मांग पर यूजीसी ने यह फैसला लिया है।
राज्यों को यूजीसी की बात माननी पड़ी थी –
यूजीसी ने इससे पहले विश्वविद्यालयों से अंतिम वर्ष की परीक्षाएं भी 30 सितंबर तक कराने के लिए कहा था। हालांकि इसे लेकर उस समय विवाद भी हुआ था। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद विरोध कर रहे राज्यों को यूजीसी की बात माननी पड़ी थी। जिसमें यूजीसी ने अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को जरूरी बताया था और कहा था कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के बगैर किसी भी छात्र को डिग्री नहीं दी जा सकती है।
ऑफिशियल वेबसाइट यहां – https://www.ugc.ac.in/
पीजी स्कॉलरशिप फॉर प्रोफेशन कोर्सेस फॉर एससी-एसटी स्टूडेंट –
इस बीच यूजीसी ने जिन पोस्ट ग्रेजुएट छात्रवृत्ति स्कीमों में आवेदन की समय सीमा बढ़ाई है, उनमें इंदिया गांधी पीजी स्कॉलरशिप फॉर सिंगल गर्ल्स चाइल्ड, पीजी स्कॉलरशिप फॉर यूनिवर्सिटी रैंक होल्डर स्टूडेंट, पीजी स्कॉलरशिप फॉर प्रोफेशन कोर्सेस फॉर एससी-एसटी स्टूडेंट और ईशान उदय स्पेशल स्कॉलरशिप फॉर नार्थ-ईस्ट स्टूडेंट प्रमुख है।
यूजीसी ने फिर से एडमिशन के लिए समय सीमा बढ़ाई –
बता दें कि कोरोना महामारी के चलते छात्रों की पढ़ाई को बहुत नुकसान हुआ है जिसको कम करने लिए ऑनलाइन मोड का सहारा लिया जा रहा है ताकि बच्चे घर बैठकर अपनी पढ़ाई कर सकें। ऐसे में नये सत्र को शुरू करने मे काफी देरी हो रही है, जिसके लिए यूजीसी ने फिर से एडमिशन के लिए समय सीमा बढ़ा दी है।
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नई शिक्षा नीति में एमफिल खत्म करने पर विश्वविद्यालय में बढ़ेगा शोधार्थियों का दबाव, पीएचडी होगा कठिन
लखनऊ :
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय सीएसजेएमयू में नई शिक्षा नीति में एमफिल खत्म करने के बाद पीएचडी अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के आसार है। दूसरे प्रदेशों से भी अभ्यर्थी आएंगे, जिसके चलते उनके बीच कड़ा मुकाबला होगा। अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने से सुपरवाइजर मिलना भी एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी ने इसके लिए जो योग्यता रखी है उसके अनुरूप उनकी तलाश आसान नहीं होगी।
शोधार्थियों को नैतिकता का ख्याल रखना होगा –
शोधार्थियों को प्री-पीएचडी कोर्स वर्क के दौरान अपने विषय के अलावा रिसर्च व पब्लिक एथिक्स पाठ्यक्रम की पढ़ाई भी करनी होती है। इसके लिए यूजीसी ने क्रेडिट कोर्स डिजाइन किया है। इसमें शोधार्थियों को कुछ नया तलाशने के साथ सभी बिंदुओं को विस्तार से बताना होगा। अपनी शोध में शोधार्थियों को नैतिकता का ख्याल रखना होगा। प्री-पीएचडी के लिए जो कोर्स तैयार किया गया है उसमें शोध प्रविधि व संबंधित विषय की पढ़ाई होती है। अगर इनमें से एक भी बिंदु शामिल नहीं करते हैं तो शोधार्थियों थीसिस निरस्त हो सकती है।




