NewsSchool Corner

CBSE Three-Language Formula: नए नियम पर पेरेंट्स और टीचर्स नाराज, 1 जुलाई से होगा लागू

सीबीएसई के थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला को 01 जुलाई से देशभर के सभी स्कूलों में लागू करने का आदेश दिया गया है। हालांकि सीबीएसई के इस फैसले के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच नाराजगी जताई जा रही है।

नई दिल्ली। CBSE Three-Language Formula: सेन्ट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की ओर से देशभर के सभी स्कूलों में एक 01 जुलाई से थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला लागू करने का आदेश दिया गया है। यह फैसला नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन के तहत लिया गया है।

सीबीएसई के आदेशानुसार अब स्कूलों में छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ-साथ तीसरी विदेशी भाषा भी पढ़नी होगी। इसके साथ ही सीबीएसई ने अंग्रेजी भाषा को विदेशी भाषा की कैटेगरी में शामिल किया है। ऐसे में छात्र अंग्रेजी भाषा के अतिरिक्त जापानी, कोरियन, फ्रेंच, जर्मन जैसी विदेशी भाषा का चयन तीसरी भाषा के रूप में कर सकते हैं।

छात्रों और अभिभावकों ने किया विरोध

सीबीएसई के इस फैसले के बाद उन छात्रों के बीच चिंता बढ़ गई है, जो अपनी पसंद की विदेशी भाषा पढ़ना चाहते हैं। लेकिन छात्र उस भाषा को अब चौथी भाषा के रूप में ही पढ़ सकते हैं। बशर्ते वह भाषा स्कूल में उपलब्ध होनी चाहिए। सीबीएसई के इस फैसले के बाद छात्र, अभिभावक और शिक्षक लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। अभिभावकों को कहना है कि इससे बच्चों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

तीन सालों से जर्मन भाषा की तैयारी

दिल्ली के रहने वाले कक्षा 9वीं के एक छात्र का सपना जर्मनी के प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी में काम करना है। इसलिए वह पिछले तीन सालों से जर्मन भाषा सीख रहा है, ताकि वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई करके जर्मनी में जाकर काम कर सके। हालांकि सीबीएसई के फैसले के बाद उनके पिता ने बताया कि मेरे बेटे ने तीन सालों तक जर्मनी भाषा का अध्ययन किया है और सीबीएसई के इस फैसले के बाद वह नौवीं कक्षा से संस्कृत की पढ़ाई कैसे शुरू कर सकता है।

यह भी पढ़ें- NEET UG Fee Refund 2026: फीस रिफंड लिंक एक्टिव, यहां जानें आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया

बच्चों पर अतिरिक्त दबाव

कक्षा नौवीं के एक छात्र की मां ने कहा कि इस नियम के तहत उनके बेटे को फ्रेंच भाषा छोड़नी पड़ सकती है। उन्होंने कहा यह एक ऐसी अवस्था है, जहां उनके बेटे को अब नई भाषा सीखनी होगी, जबकि उसे अपने मुख्यों विषयों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह नियम बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डालेगा। नई भाषा सीखना तब ज्यादा आसान होता है, जब उसे शुरुआती चरण में ही सिखाया जाए। सीबीएसई को इसे कक्षा I और V के बीच ही शुरू करनी चाहिए, क्योंकि तब नई भाषा सीखना ज्यादा आसान होता है।

कक्षा 6 से लागू होना चाहिए था नियम

सीबीएसई के इस फैसले से वे छात्र सबसे ज्यादा प्रभाविक हो रहे हैं, जो विदेशी भाषा का अध्ययन कर रहे थे। एक छात्र की मां अभिलाषा ने कहा कि सीबीएसई को यह बदलाव अचानक करने के बजाय धीरे-धीरे करना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि इस नियम को कक्षा 6 से लागू किया जाना था। मेरी बेटी ने अंग्रेजी को अपनी पहली भाषा के रूप में चुना है और वह हिंदी को भारतीय भाषा के रूप में पढ़ सकती है। लेकिन दूसरी भाषा कौन-सी होगी और वह पिछले तीन सालों से जर्मन भाषा सीख रही है।

स्कूल प्रशासकों ने क्या कहा

सीबीएसई के इस नियम को लागू करने के बाद स्कूल प्रशासकों द्वारा कहा गया है कि दूसरी भाषा के लिए हर हफ्ते 6 से 7 अतिरिक्त पीरियड जोड़ने होंगे। इसके कारण समय सारिणी में तो बदलाव होगा ही। साथ ही इससे खेलकूद, पुस्तकालय और जीवन कौशल पीरियड भी प्रभावित होंगे। इसके साथ ही स्कूल में अन्य भाषा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी करनी होगी, जिससे स्कूल पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव भी बढ़ सकतीा है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: you can not copy this content !!