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यूजीसी को पत्र लिखकर जीटीयू के छात्रों ने परीक्षाएं रद्द करने की मांग की - Global E-Campus
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यूजीसी को पत्र लिखकर जीटीयू के छात्रों ने परीक्षाएं रद्द करने की मांग की

नई दिल्ली।

गुजरात टेक्निकल यूनिवर्सिटी (GTU) के छात्रों ने परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को पत्र लिखा है। छात्रों द्वारा यूजीसी को लिखे पत्र में कहा गया है कि कोरोना मामलों में गुजरात देश में चौथे स्थान पर है। एक्टिव मामलों में 6वें नंबर पर और मौत के मामले में तीसरे स्थान पर है। इसलिए यहां परीक्षाएं कराना काफी मुश्किल भरा हो सकता है। कोविड-19 महामारी संकट के चलते विश्चविद्यालय की परीक्षाओं को लेकर बनी अनिश्चितता से छात्रों में असंतोष बढ़ता रहा है। कहीं परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की जा रही है तो कहीं सवाल पूछे छा रहे हैं कि बिना परीक्षा के स्नातक प्रथम वर्ष और द्वितीय वर्ष का परिणाम किस आधार पर जारी किया जाएगा।

एक रिपोर्ट के अनुसार, जीटीयू फाइनल ईयर के छात्रों ने विश्वविद्यालय की ओर से 2 जुलाई में परीक्षा कराने के फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कुछ दिन पहले जीटीयू के वाइस चांसलर नवीन सेथरोटे ने यूजीसी को पत्र लिखकर परीक्षा कराने के मामले में विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता देने की मांग की थी। जीटीयू ने फाइनल की परीक्षाएं 2 जुलाई से कराने की तैयारी में है।

जीटीयू के विभिन्न कोर्सों के छात्रों ने यूजीसी को पत्र लिखकर मांग की कि कोरोना वायरस संक्रमण को ध्यान में रखते हुए जीटीयू को परीक्षाएं न कराने के दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। छात्रों ने मांग की निश्चित रूप से जीटीयू की परीक्षाएं खासकर फाइनल की रद्द कराई जाएं क्योंकि जीटीयू न तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करा रहा और न ही यहां सैनिटाइजेशन कराया जा रहा। छात्रों ने यह भी मांग की परीक्षाएं कराने के बजाया छात्रों को उनकी मेरिट के आधार पर आगे मार्किंग तय की जाए। इससे कई छात्र कोरोना के इंफेक्शन से बच सकते हैं। इस मामले पर विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया है कि उन्हें यदि यूजीसी की ओर से ऐसे निशा निर्देश मिलते हैं तो वह जरूरी परीक्षाओं के बजाए मेरिट पर आधारित प्रोग्रेशन पर अमल करेंगे। यहां तक कि फाइनल ईयर के छात्रों को भी इसी आधार पर पास किया जाएगा।

बताते चलें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने परीक्षाओं और अकादमिक कैलेंडर के लिए विशेषज्ञ समिति से समीक्षा करने और अपने दिशा-निर्देशों को संशोधित करने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

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