केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश दिलाने को सांसद और डीएम के कोटे पर लगी रोक
केंद्रीय विद्यालय प्रवेश कोटा

नई दिल्ली: केंद्रीय विद्यालय संगठन ने सांसद और जिलाधिकारी कोटे से प्रवेश पर रोक लगा दी है। जारी किए गए आदेश में कहा गया है कि सांसद कोटे और जिलाधिकारी कोटे सहित विशेष प्रावधानों के तहत केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश पर अगले आदेश तक रोक लगाई जा रही है।
कोटा खत्म होने की सुगबुगाहट हो गई थी
कई सांसदों ने इस कोटे को भेदभावपूर्ण बताया था। लोकसभा में मांग उठाई थी कि इसे खत्म कर दिया जाए। हालांकि कुछ सांसद ऐसे थे जिन्होंने सीटों की संख्या बढ़ाने की वकालत की थी। हाल ही में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी यही मुद्दा उठाया था।
क्या है केंद्रीय विद्यालय में सांसद कोटा?
1975 में केंद्र सरकार ने केंद्रीय विद्यालयों में विशेष योजना के तहत सांसद कोटा का निर्धारण किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के लिए सीटों की संख्या तय की गई थी। इसके माध्यम से जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के प्रमुख और जरूरतमंद लोगों को सुविधा दे सकते थे। सांसद केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय विद्यालय संगठन को एक कूपन और छात्र जिसका प्रवेश कराना हो उसकी पूरी जानकारी भेजते हैं। इसके बाद संगठन द्वारा आधिकारिक वेबसाइट पर शॉर्टलिस्ट किए गए छात्र का नाम जारी किया जाता है और इसके बाद एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होती है। हालांकि, ध्यान देने वाली बात है कि यह सुविधा केवल पहली से नौवीं कक्षा तक ही लागू होती है। सांसदों के साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पास भी 450 छात्रों को प्रवेश दिलाने का कोटा दिया गया है।



