भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव 2020 में होगा विमेन साइंटिस्ट कॉन्क्लेव
आउटरीच कार्यक्रम में महिलाओं की बड़ी भागीदारी पर हुआ मंथन

लखनऊ :
अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (22 – 25 दिसंबर) में विमेन साइंटिस्ट कॉन्क्लेव भी आयोजित हाेगा। जिसका आयोजन डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, एमआईईटी मेरठ व विज्ञान भारती (अवध प्रांत) के संयुक्त तत्वावधान में होगा। विमेन साइंटिस्ट कॉन्क्लेव के लिए रविवार को आउटरीच तथा विज्ञान यात्रा कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। कार्यक्रम विशेष रूप से विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कराने पर आधारित था।
शोध कार्यों में महिलाओं के योगदान पर विचार व्यक्त किए –
आउटरीच कार्यक्रम में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के तौर पर CSIR-NISTADS की निदेशक डॉ. रंजना अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त किए। विशिष्ट अतिथि के तौर पर बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलीओबॉटनी, लखनऊ की निदेशक डॉ. वंदना प्रसाद ने महिलाओं के विज्ञान में भागीदारी पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं विशिष्ट अतिथि के तौर पर किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ की प्रोफेसर डॉ तूलिका चंद्र ने विज्ञान विषय में महिलाओं की बढ़ती रूचि तथा शोध कार्यों में महिलाओं के योगदान पर विचार व्यक्त किए। विज्ञान भारती अवध प्रांत की ओर से डॉ मधूलिका सिंह ने पारंपरिक ज्ञान का महत्व बताते हुए महिलाओं के शोध एवं उद्यम पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत रूप से सरस्वती वंदना के साथ हुआ –
इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं विशेष वक्ता के तौर पर आमंत्रित वंदना ठाकुर ने नवाचार में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। विमेन साइंटिस्ट कॉन्क्लेव कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के फिजिक्स एवं इलेक्ट्रॉनिक विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ गीतिका श्रीवास्तव ने किया। स्वागत परिचय विज्ञान भारती अवध प्रांत के संगठन मंत्री श्रेयांश मंडलोई द्वारा किया गया। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ परंपरागत रूप से सरस्वती वंदना और उसके बाद वर्चुअल माध्यम से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। वहीं इस अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन संदीप द्विवेदी द्वारा किया गया।
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भारतीय संस्कृति और विज्ञान पर विद्वानों ने रखे विचार –
विशेष रूप से आमंत्रित नागपुर से शंकर तत्ववादी ने देश की शिक्षा के अवमूल्यन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हम उधार की शिक्षा पर आश्रित हो गए हैं जिसमें विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही उपलब्ध कराया जा रहा है। शिक्षा से माटी की गंध विलुप्त हो गई है और हमारे वेद, पुराण और प्रकृति इस किताबी शिक्षा से लगभग ओझल हो गए हैं। कार्यक्रम में बीरबल साहनी पुरातात्विक अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ वंदना प्रसाद ने कहा कि भारत संस्कृति एवं शोध का विपुल भंडार है और सांस्कृतिक मूल्य बहुत बड़ी संपदा है।
इस संपदा के सुचारू रूप से संचालन में महिला सुधारकों, वैज्ञानिकों व महिला चिंतकों की अत्यंत सराहनीय भूमिका रही है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को रेखांकित करते हुए कहा कि हमें इसके साथ-साथ जीवन की सार्थकता के लिए महिलाओं को उचित सम्मान देना होगा। आभासी संसार में जीने वाले युवाओं के बारे में विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों ने मनुष्य को एकाकी बना दिया है। वह मोबाइल और इंटरनेट में खो गया है और उसके पास अपने परिवार व परिजनों के लिए समय ही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देकर स्थूल और सूक्ष्म के भेद को समझाया। कहा कि जिस प्रकार बीज अपना अस्तित्व मिटा कर एक वृक्ष को जन्म देता है उसी प्रकार हमें नव निर्माण के लिए हर प्रकार के त्याग के लिए तत्पर रहना होगा।
नवाचार में नई उपलब्धियों और अवसरों के लिए सराहना की –
विशिष्ट अतिथि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तूलिका चंद्र ने महिला वैज्ञानिकों के समक्ष उपलब्ध चुनौतियों की चर्चा की और कहा कि हम अभी तक शोध कार्यों में महिलाओं की उचित भागीदारी सुनिश्चित नहीं कर पाए हैं। उन्होंने कहा कि हम आत्मनिर्भर हुए बिना विश्व का कल्याण नहीं कर पाएंगे और इसमें महिला शोधार्थियों को आगे आना होगा। मेरठ इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से वेन की हेड वंदना ठाकुर ने महिलाओं को नवाचार में नई उपलब्धियों और अवसरों के लिए सराहना की और इसकी सफलता के लिए नए आयाम स्थापित करने पर चर्चा की।
“आपदा को अवसर में बदलने” के उद्घोष की हुयी चर्चा –
कार्यक्रम की आधारशिला पर चर्चा करते हुए विज्ञान भारतीय अवध प्रांत के संगठन मंत्री श्रेयांश मंडलोई ने कहा कि यह आयोजन संपूर्ण विश्व में न केवल सबसे बड़ा आयोजन है अपितु विश्व में सबसे अनूठा भी है। उन्होंने कहा कि यह युवा शक्ति को प्रेरित और उनके मन को आंदोलित करने वाला आयोजन है। भारत के प्रधानमंत्री के “आपदा को अवसर में बदलने” के उद्घोष की चर्चा करते हुए कोविड-19 के काल में हुई प्रगति को रेखांकित किया।



