आखिर क्या है जेएनयू विवाद : साभार : विकिपीडिया

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवाद कोई नई बात नहीं है।समय-समय पर लोग इसे ‘घातक राजनीति का अड्डा’, ‘देशद्रोही गतिविधियों का केन्द्र’, ‘दरार का गढ़’ आदि कहते रहे हैं। इसके छात्रों और अध्यापकों पर भारत में नक्सवादी हिंसा का समर्थन करने और भारतविरोधी कार्यों में संलिप्त रहने के आरोप भी लगते रहे हैं।

२०१६ विवाद
छात्रों के एक समूह ने 9 फरबरी 2016 को 2001 भारतीय संसद हमले के दोषी अफज़ल गुरु की फांसी की तीसरी बरसी के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का नाम कश्मीरी कवि आगा शाहिद अली के काव्य संग्रह “बिना डाक-घर वाला देश” (जो जम्मू कश्मीर के एक हिंसक समय के बारे में है) पर रखा गया था।
इस कार्यक्रम के छात्र आयोजकों ने सारी परिसर में पोस्टर लगाए थे जिनमें लिखा था कि सभी (हिन्दी अनुवाद) “9 फरबरी, मंगलवार को साबरमती ढाबे” में “ब्राह्मणवादी विचारधारा के विरुद्ध”, “अफज़ल गुरु और मकबूल भट्ट की न्यायिक हत्या (उनके अनुसार) के विरुद्ध”, “कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के लोकतांत्रिक अधिकार के लिए संघर्ष के समर्थन में” “कवियों, कलाकारों, गायकों, लेखकों, विद्यार्थियों, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं के साथ सांस्कृतिक संध्या, और कला और फ़ोटो प्रदर्शनी” पर आमंत्रित हैं।
जे॰एन॰यू॰ छात्र संघ के संयुक्त सचिव सौरभ कुमार शर्मा (जो एबीवीपी से है) ने इसकी शिकायत करते हुए विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति जगदीश कुमार को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उसने लिखा कि “ये गतिविधियाँ परिसर की शांति और सामंजस्य को खत्म कर देगी”, और कार्यक्रम के आयोजक छात्रों को निस्सारित करने का अनुरोध किया।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने “कार्यक्रम के प्रकार की गलतबयानी” का हवाला देते हुए इसे अनुमति नहीं दी। विश्वविद्यालय के उप-कुलाधिपति प्रोफेसर जगदीश कुमार ने कहा: “हिन्दी अनुवाद: हम ने सुना था कि कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम है पर हमें बाद में पता चला कि ये एक विरोध मार्च है। हमें यह पोस्टरों से पता चला, पर इसके बारे में हम से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इसलिए विश्वविद्यालय में शांति का माहौल बनाए रखने के लिए हम ने इसे रद्द कर दिया।”
इसके बावजूद आयोजकों ने कार्यक्रम जारी रखने का फैसला किया और विरोध मार्च की जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, और मुद्दे पर कला और फ़ोटो प्रदर्शनी आयोजित करने का फैसला किया।

विवादास्पद नारेबाजी
कथित तौर पर कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने भारत विरोधी नारे (जैसे: भारत की बर्बादी तक, जंग लड़ेंगे, जंग लड़ेगे / ‘कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ / ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’) लगाए।इस बात से गुस्सा होकर एबीवीपी के सदस्य उप-कुलाधिपति के कार्यालय के बहार इकट्ठा हो गए और राष्ट्र विरोधी गतिविधि करने वाले छात्रों के निष्कासन की मांग में नारे लगाने लगे।
इस राष्ट्र विरोधी नारेबाजी की आम जनता ने बहुत निंदा की क्योंकि जे॰एन॰यू॰ के छात्रों को पढाई में करदाता के पैसे से भरी सब्सिडी मिलती है। इस कार्यक्रम और उसमें लगे नारों पर भारत के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रविरोधी नारे लगाने वालों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा, जबकि मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा कि भारत माता का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कुमार विश्वास ने कहा कि देशद्रोहियों पर केन्द्र कड़ी कार्यवाही करे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के एक पूर्व सहायक मंत्री ट्वीट कर वेश्याओं को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्राओं से बेहतर बताया और कहा कि वेश्यायें केवल देह बेचतीं हैं जबकि इन छात्राओं ने तो देश ही बेच दिया।