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NCERT ने जलियांवाला बाग कांड पर जोड़ा नया तथ्य, ‘माफी’ वाली बात पर बढ़ी चर्चा

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और स्कूल एजुकेशन के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के हिसाब से NCERT नई टेक्स्टबुक्स बना रहा है। क्लास 1 से 8 तक के लिए टेक्स्टबुक्स अब तक बन चुकी हैं। 8वीं क्लास की पार्ट-2 बुक में ब्रिटिश राज, स्वतंत्रता संग्राम, जलियांवाला बाग और पार्टीशन को लेकर लेटेस्ट वर्जन जोड़ा है।

NCERT Class 8 New Book : 13 अप्रैल 1919 का दिन जलियांवाला बाग में हजारों भारतीयों की निर्मम हत्या और ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता का प्रतीक है। अमृतसर में बैसाखी मेले में शिरकत करने पहुंचे हजारों निहत्थी जनता को जनरल डायर ने अंग्रेज सिपाही के साथ घेरकर गोलियों से छलनी कर दिया था। इनमें औरतें, बच्चे और बूढ़े भी शामिल थे। ब्रिटिश सरकार की क्रूरता की गोलियों के निशान के रूप में बाग की दीवारों पर आज तक मौजूद हैं। लेकिन क्या कभी ब्रिटिश सरकार ने इस नरसंहार के लिए माफी मांगी? NCERT ने 8वीं क्लास की नई बुक में इस ‘नए सच’ पर बड़ा अपडेट दिया है।

दरअसल, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 23 फरवरी, 2026 को क्लास 8 की सोशल साइंस की नई टेक्स्टबुक जारी की। इस बुक में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान की कई घटनाओं के बारे में डिटेल्ड में बताया है और लेटेस्ट वर्जन जोड़ा है। जनरल नॉलेज ( जीके) की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी किताब ने नए अध्याय खोले हैं।

नई बुक के ‘इंडियाज लॉन्ग रोड टू इंडिपेंडेंस’ नाम के चैप्टर में, एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2 — 1857 के विद्रोह के बाद से लेकर 1947 तक के समय को कवर करती है, जिसमें आजादी के आंदोलन, बंगाल के बंटवारे और भारत के बंटवारे के बारे में बताया गया है। इस बुक में 1919 जलियांवाला बाग हत्याकांड पर एक नया वर्जन छापा गया है। जिसमें इस हत्याकांड के लिए ब्रिटिश सरकार से माफी मांगने की रिक्वेस्ट का जिक्र भी किया गया है।

1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड पर, किताब में कहा गया है कि ‘आज तक, कई रिक्वेस्ट के बावजूद, ब्रिटिश सरकार ने इस जुल्म के लिए माफी नहीं मांगी है, बस इसे ‘ब्रिटिश इतिहास की एक बहुत शर्मनाक घटना’ बताया है।’ पुरानी किताब में माफी मांगने का जिक्र नहीं है। पुरानी किताब में यह नहीं था। हालांकि यहां माफी मांगने की कई रिक्वेस्ट का मतलब पब्लिक या राजनीतिक मांगों से है, भारत सरकार ने कभी ऐसी कोई रिक्वेस्ट नहीं की।

क्या जलियांवाला बाग के दोषी जनरल डायर को कोई सजा मिली?

नहीं, जलियांवाला बाग में हजारों लोगों की जान लेने का ऑर्डर देने वाले जनरल डायर को कोई कठोर सजा या कोई कानूनी सजा नहीं मिली। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने जनरल रेजिनाल्ड डायर की कार्रवाई को ‘Inhuman’ और ‘Un-British’ करार दिया था, लेकिन कभी कोई सजा नहीं दी। जलियांवाला बाग गोलीकांड के एक साल बाद यानी 1920 में ब्रिटिश सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई जिसने हंटर कमीशन रिपोर्ट 1920 दी। इस रिपोर्ट में माना गया कि डायर के आदेश पर जलियांवाला बाग में 379 मौतें हुईं, ये आंकड़ा सरकारी है। असल में वहां हजारों लोगों की जान गई थी। लेकिन रिपोर्ट में भी इस क्रूरता के लिए माफी को लेकर कोई सवाल नहीं था। रिपोर्ट में सिर्फ डायर की निंदा करके छोड़ दिया गया।

पार्टीशन पर क्या कहती है नई बुक

एनसीईआरटी की नई किताब में और भी कई चीजों को जोड़ा गया है, जो पहले नहीं थीं। पार्टीशन वाले सेक्शन के आखिर में, लिखा है कि हालांकि महात्मा गांधी और ज्यादातर कांग्रेस नेताओं ने 1947 में देश के बंटवारे के विचार का विरोध किया था, लेकिन ‘उन्होंने आखिर में इसे ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता मान लिया, भले ही यह भी साफ था कि भारतीय मुसलमानों का एक खास हिस्सा बंटवारे के पक्ष में नहीं था।’

क्लास 8 की पुरानी हिस्ट्री की किताब में सिर्फ इतना लिखा था कि ‘ब्रिटिश राज से हमारे देश की आजादी की खुशी, पार्टीशन के दर्द और हिंसा के साथ मिली-जुली थी।’ लेकिन नई किताब बताती है कि इतिहासकारों ने भारत से ब्रिटिश सरकार के बाहर निकलने के कारणों पर बहस की है, और ‘पहले यह माना जाता था कि यह ज्यादातर गांधी, उनके अहिंसा के सिद्धांत और कांग्रेस की नीतियों की वजह से हुआ।’

इसमें आगे कहा है, ‘इस नजरिए ने इस बात को माना है कि कई और वजहें भी काम कर रही थीं – आम लोगों का विद्रोह, क्रांतिकारियों की कई कोशिशें, रॉयल इंडियन एयर फोर्स और रॉयल इंडियन नेवी में बगावत।’ इसमें कहा गया है, ‘इसके अलावा, दूसरे विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का कम होता रुतबा, और दुनिया भर में डीकोलोनाइजेशन का ट्रेंड-साम्राज्यों का दौर खत्म हो गया था, कम से कम उस रूप में तो।’

बता दें कि NCERT, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 और स्कूल एजुकेशन के लिए नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2023 के हिसाब से नई टेक्स्टबुक्स बना रहा है। क्लास 1 से 8 तक के लिए टेक्स्टबुक्स अब तक बन चुकी हैं। क्लास 8 के लिए सोशल साइंस की टेक्स्टबुक का पार्ट 1 पिछले साल जुलाई में रिलीज हुआ था।

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