
लखनऊ: भारत का पेरिस ओलंपिक में अभियान 1 सिल्वर और 5 ब्रॉन्ज सहित कुल 6 पदकों के साथ समाप्त हो गया। लेकिन दोहरी पदक संख्या का आंकड़ा काफी दूर रह गया। भारत टोक्यो ओलंपिक के पिछले 7 पदकों के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाया। इन खेलों में भारत की पदक उम्मीदों पर महिला पहलवान विनेश फोगाट का 100 ग्राम वजन अधिक होने का मामला काफी भारी पड़ा। हालांकि विनेश की संयुक्त रजत मिलने के अपील पर फैसला होना अभी बाकी है।
विनेश के मामले पर चर्चा अभी काफी दिनों तक चलेगी। पेरिस ओलंपिक शुरू होने से पहले इस बात को बड़े जोर-शोर से दावा किया जा रहा था कि भारत इस बार ओलंपिक में दोहरी पदक संख्या का आंकड़ा जरूर पार करेगा। लेकिन अंत में जाते-जारी स्थिति 6 पदक की रह गयी जिसमें कोई स्वर्ण पदक शामिल नहीं था। स्वर्ण की सबसे बड़ी उम्मीद भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा रजत पर ठिठक कर रह गए। भारत के हिस्से 5 कांस्य पदक आये जिसमें 2 तो निशानेबाज मनु भाकर ने ही दिलाये।
भारत ने आजादी के बाद से ओलंपिक खेलों में एक मजबूत और निरंतर उपस्थिति दर्ज की है, जहां भारतीय खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया है। भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हॉकी में आठ स्वर्ण पदक हैं। भारत ने पांच हॉकी गोल्ड आजादी के बाद जीते है।
हाल के वर्षों में, भारत ने बैडमिंटन, कुश्ती, और एथलेटिक्स जैसे खेलों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। आजादी के बाद की बात करें तो भारत ने कुल 36 पदक जीते है। जिनमें से 25 व्यक्तिगत पदक शामिल है, शेष भारतीय हॉकी टीम और एक पदक साल 2024 ओलंपिक खेलों में शूटिंग में आया है। इस दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने 25 से अधिक खेलों में भाग लिया।



