रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने जारी किया बीटेक,एमबीए, बीफार्म की ऑफलाइन कक्षाओं का शेड्यूल

लखनऊ :
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय की इंजीनियरिंग फैकल्टी द्वारा बीटेक, एमबीए और बीफार्मा में ऑफलाइन कक्षाओं का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। रुहेलखंड विश्वविद्यालय की जारी शेड्यूल के मुताबिक एमएससी दि्तीय वर्ष की कक्षाएं सात दिसंबर से शुरू होंगी। जबकि बीटेक, एमबीए और बीफार्मा की कक्षायें 14 दिसंबर से शुरू होगी। कक्षाओं में आने वाले छात्र-छात्राओं के रजिस्ट्रेशन नौ दिसंबर से होंगे। छात्रों व अन्य सभी को कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करना होगा। बीते तीन दिसंबर को विभागाध्यक्षों की बैठक में यह निर्णय लिया गया था, जिसे शनिवार को जारी कर दिया गया।
प्रथम वर्ष की ऑफलाइन कक्षाएं 14 दिसंबर से शुरू –
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीटेक, एमबीए, एमसीए विभाग फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित किए जाते हैं। इनमें प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं की कक्षाएं शुरू की जानी है, जिसका शेड्युल तय हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक बीटेक और बीफार्मा चौथे वर्ष, एमसीए तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों को 9 दिसंबर, बीटेक- बीफार्मा तीसरे वर्ष, एमसीए दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों को 10 दिसंबर और बीटेक-बीफार्मा दूसरे वर्ष के विद्यार्थियों को 11 दिसंबर को विभाग में पहुंच कर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। एमएससी द्वितीय वर्ष की कक्षाएं सात दिसंबर और बीटेक, बीफार्मा, एमसीए और एमएससी प्रथम वर्ष की ऑफलाइन कक्षाएं 14 दिसंबर से शुरू होंगी। सभी विभाग के हेड को निर्देश दिए गए हैं कि कोविड-19 प्रोटोकाल के हिसाब से क्लास का टाइम टेबल जारी करें।
कोरोना प्रोटोकॉल करने होंगे फॉलो –
सभी विद्यार्थियों को मास्क पहन कर सैनिटाइजर के साथ आना होगा। सोशल डिस्टन्स रखना होगा। कक्षाएं शारीरिक दूरी के अनुसार लगेंगी। डीन की ओर से जारी पत्र के मुताबिक अगर किसी विभाग ने शेड्यूल पहले से बना लिया है तो इसकी सूचना देनी होगी।
हॉस्टल अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू –
कक्षाओं का शेड्यूल जारी होते ही अब हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया भी सोमवार से शुरू हो जाएगी। छात्र-छात्राओं को मेस और हॉस्टल फीस का डिमांड ड्राफ्ट लाने के निर्देश दिए गए हैं। हॉस्टल को पहले ही सैनिटाइज कराया जा चुका है। अब फिर से सैनिटाइज कराया जाएगा। इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए छात्र विवि जाकर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकते है या फिर वे वेबसाइट भी चेक कर सकते है। छात्र ऑफलाइन कक्षाओं मे यूजीसी द्वारा जारी जरूरी निर्देश अवश्य ही फॉलो करें।
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संस्कृत विवि का ई-गंगोत्री योजना पर हुआ समझौता, सिंगापुर के सहयोग से ऑनलाइन होंगी शोध पत्रिकाएं

लखनऊ :
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने हाल में ही सिंगापुर की एक कंपनी के साथ शोध ग्रंथों का डिजिटलाइजेशन कर आनलाइन अपलोड करने का समझौता किया है। इसकी लांचिंग छह दिसंबर को की जाएगी। संस्कृत विश्वविद्यालय दुर्लभ ग्रंथों व शोध पत्रिकाओं का विशाल भंडार है। डिजिटलाइजेशन के अभाव में इन शोध पत्रिकाओं को अब तक आनलाइन नहीं किया जा सका है। ऐसे में बौद्धिक खजाने के रूप में सरस्वती भवन पुस्तकालय में सहेज कर रखे गए दुर्लभ ग्रंथों व शोध पत्रिकाओं का लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते ही ई-गंगोत्री योजना पर सिंगापुर की कंपनी के साथ समझौता किया गया है।
154 वर्ष पुराने शोध पत्रिकाओं को भी अब आनलाइन करने का निर्णय –
बता दें कि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1791 में राजकीय संस्कृत कालेज के रूप में हुई थी। इस प्रकार विगत दो सौ से भी अधिक वर्षों से संस्था में परंपरागत विद्याओं का अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान का कार्य भी चल रहा है। शोध पत्रिका काशीविद्या सुधानिधि का प्रकाशन वर्ष 1866 जारी है। वर्ष 1876 में संस्कृत व अंग्रेजी दो भाषाओं में प्रकाशित होने वाली पत्रिका दि पंडित नाम से पत्रिका का प्रशासन शुरू किया गया। वर्ष 1917 में इसका नाम सरस्वती भवन अध्ययनमाला व ग्रंथमाला तथा वर्ष 1962 में इसका नाम सारस्वती सुषमा कर दिया गया।



