सऊदी अरब में लेबर नियमों में बदलाव, अब कंपनी पासपोर्ट जब्त नहीं कर सकेगी।

सऊदी अरब में जॉब करने वाले कई सारे ऐसे भारतीय वर्कर्स हैं, जिन्हें शोषण का सामना करना पड़ा है। मगर अब ये समस्या खत्म होने वाली है।
सऊदी अरब की सरकार ने अपने यहां लेबर नियमों में बदलाव किया है और कड़ा जुर्माना लगाने के प्रावधान को लागू कर दिया है। इसका सीधा फायदा उन विदेशी वर्कर्स को मिलेगा, जो यहां जॉब करने जाने पर सऊदी कंपनियों के शोषण का शिकार बन जाया करते थे। कंपनियां अब अपनी मर्जी से वर्कर्स का पासपोर्ट या रेजिडेंसी परमिट जब्त नहीं कर सकती हैं। अगर कोई कंपनी ऐसा करते हुए पाई जाती है तो फिर सरकार उस पर भारी-भरकम जुर्माना लगाएगी।
दरअसल, सऊदी अरब में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां वर्कर्स का पासपोर्ट छीन लिया जाता था और फिर उनसे जबरन बंधुआ मजदूरी करवाई जाती थी। इस तरह की घटनाओं का शिकार ज्यादातर लो स्किल वर्कर्स बनते रहे हैं, जो इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, राजमिस्री, कंस्ट्रक्शन वर्कर जैसे काम करने सऊदी अरब जाते हैं। हालांकि, अब सऊदी सरकार अब अपनी छवि सुधारना चाहती है। इसे ध्यान में रखते हुए ही नए लेबर नियम लाए गए हैं, ताकि कंपनियों को कंट्रोल कर शोषण खत्म किया जा सके।
नए नियमों में क्या कहा गया है?
गल्फ न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने ऐलान किया है कि अगर कोई कंपनी बिना वैलिड परमिट किसी विदेशी वर्कर को नौकरी पर रखती है, तो उस पर 10 हजार सऊदी रियाल का जुर्माना लगेगा। श्रम कानून के अनुच्छेद 167 का उल्लंघन करते हुए 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को काम पर रखने को अब गंभीर अपराध माना जाएगा। इस तरह के केस में 50 या उससे ज्यादा वर्कर्स वाली कंपनी पर 2 हजार सऊदी रियाल तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
किसी कंपनी को वर्कर का पासपोर्ट या रेजिडेंसी परमिट अपने पास रखने की इजाजत नहीं होगी। अगर कोई कंपनी ऐसा करती है, तो उस पर प्रति वर्कर के हिसाब से 3 हजार सऊदी रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी तरह से श्रम कानून के अध्याय 10 के अंतर्गत नाबालिगों के रोजगार संबंधी नियमों का पालन ना करने वाली कंपनियों पर प्रत्येक उल्लंघन के लिए 1,500 सऊदी रियाल का जुर्माना लगाया जा सकता है। मैटरनिटी लीव नहीं देने वाली कंपनियों पर प्रति कर्मचारी 1 हजार रियाल का जुर्माना लगेगा।
अगर किसी कंपनी में 50 या उससे ज्यादा महिलाएं काम कर रही हैं और वहां 6 साल की उम्र से कम के 10 बच्चे हैं, तो फिर चाइल्डकेयर फैसिलिटी या नर्सरी होना जरूरी होगा। नियम नहीं मानने पर 3 हजार रियाल का जुर्माना लगाया जाएगा। कंपनी अगर जॉब से जुड़े डॉक्यूमेंट्स को इलेक्ट्रॉनिकली अपलोड नहीं करती है, तो फिर उसे प्रति वर्कर 1 हजार रियाल जुर्माना भरना पड़ सकता है। बिना इजाजत विदेशी वर्कर्स को जॉब देने वाले लोगों पर 2 लाख रियाल तक का जुर्माना लगेगा।



