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विज्ञान vs अंधविश्वास: बाल विज्ञान कांग्रेस में असलम बाबा के मरहम से कर दिया ऑपरेशन 

31वां राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस

मिर्जापुर: विद्या संस्कार पब्लिक स्कूल में आयोजित 31 वें राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में अंधविश्वास और विज्ञान जागरूकता पर कार्यशाला आयोजित की गई। प्रमोद कुमार मिश्र विज्ञान संचारक प्रयाग राज नैनी ने कहा कि आप सभी विज्ञान से जुड़े है आपकी भूमिका महत्वपूर्ण है। समाज को अंध विश्वास से दूर रहने के लिए जागरूक करना चाहिए क्योंकि अविश्वास से अनेकों जिंदगी चली जा रही है ।उन्होंने विभिन्न एक्टिविटी को करके दिखाया और कहा की तांत्रिक एवम ढोंगी लोग अनेकों अंधविश्वास के माध्यम से लोगों को बेवकूफ बनाते हैं जिसमे विज्ञान का सहारा लेते हैं। मिड ब्रेन एक्टिविटी,जीभ पर कपूर जलाना, सिर पर आग लगा कर चाय पकाना,जीभ से त्रिशूल पार करना,बोतल में जिन बंद करने,असलम बाबा के मरहम से आपरेशन करना,गागर में सागर होना,चाकू से लोटे में भरे चावल को उपर उठाना,भूत होने का भ्रम होना जैसे 80एक्टिविटी को करके दिखाया।

विशेषज्ञ हिमानी उपाध्याय इलाहाबाद विश्वविद्यालय कम्युनिकेशन स्किल पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वर्बल कम्युनिकेशन के बेसिक मॉडल के बारे में जानकारी दिया। वर्बल कम्युनिकेशन के प्रकार एवम नान वर्बल कम्युनिकेशन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बच्चो को कम्युनिकेशन के विभिन्न आयामों के बारे में जानकारी दी एवम बच्चो को को मोटिवेट किया।

हल्दी डालने से दूर होता है पानी का आर्सेनिक 

विशेषज्ञ डॉक्टर आरके सिंह, प्रोफेसर ए सी एन एन आर्यभट्ट नालेज यूनिवर्सिटी पटना ने नैनो पार्टिकल पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा हल्दी नैनो पाउडर से पानी में मौजूद आर्सेनिक दूर हो जाती है। उन्होंने जे सी बोस के पेड़ो पर प्रयोग पर जानकारी दी। विशेषज्ञ डी के सिंह वाटर माडल रॉकेट्री के सिद्धांत को न्यूटन के तृतीय नियम के आधार पर जानकारी दी एवम उसका प्रयोग भी कर के दिखाया।

गेहूं की जगह जौ खाएं मधुमेह से बचेंगे 

विशेषज्ञ डॉक्टर एस के गोयल कृषि वैज्ञानिक राजीव गांधी दक्षिणी परिसर बीएचयू ने श्री अन्न (मिलेट्स) के वैज्ञानिक महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया की इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया। हमारे देश में तेरह प्रकार के मिलेट्स पैदा होता है। ज्वार बाजरा, कोदो, चना आदि पैदा होता है। हम दैनिक जीवन में गेंहू से जुड़ गए है जो हमारे लिए बहुत लाभदायक नही है,इसके स्थान जौ का प्रयोग कर मधुमेह रोग पर नियंत्रण कर सकते है।

अपनी सेहत के मिट्टी की सेहत सुधारना जरूरी 

डॉक्टर एस एन सिंह मृदा वैज्ञानिक राजीव गांधी दक्षिणी परिसर बी एच यू बरकछा मिर्जापुर ने कहा की यदि हमे अपनी सेहत सुधारना है तो मिट्टी की सेहत सुधारना होगा। मिट्टी की संरचना में 25प्रतिशत पानी एवम 25 प्रतिशत हवा के साथ 45 प्रतिशत मिनरल मैटर एवम 5 प्रतिशत में कार्बनिक पदार्थ के साथ सूक्ष्म जीव भी पाए जाते है। पौधे के लिए कुल 17 पोषक तत्व आवश्यक है, जिसमे कार्बन ,हाइड्रोजन,एवम ऑक्सीजन को संरचनात्मक पोषक तत्व कहलाते है। नाइट्रोजन,फॉस्फोरस,पोटाश को प्राथमिक पोषक तत्व कहते है।कैल्शियम,मैग्नीशियम एवम सल्फर को द्वितीयक पोषक तत्व कहते है। सूक्ष्म पोषक तत्वों में लोहा, ताबा,जिंक,मैग्निज,क्लोरिन ,बोरान,निकिल पाए जाते है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की 1से4 मिलीग्राम पौधो के लिए आवश्यक है।

विशेषज्ञ डॉक्टर जय पी राय कृषि वैज्ञानिक प्लांट पैथालॉजी बीएचयू ने कहा कि पौध रोग अधिकांश फफूद द्वारा उत्पन्न किए जाते है जिनके प्रबंधन के की समेकित तकनीक अपनाने से रासायनिक जीवनाशियो के प्रयोग को कम किया जाता है। फसलों में अथवा घरेलू पौधो में लगने वाले कीड़ों के प्रबंधन के लिए अनेकों हर्बल उपलब्ध है जिन्हें घरेलू सामग्री से तैयार करके स्थानीय स्तर पर प्रयोग करके उनके प्रभावशीलता के अध्ययन पर विभिन्न प्रोजेक्ट विकसित किए जा सकते है।

 

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