MBA के लिए अमेरिका से दूरी बना रहे छात्र, क्या वजह है—ट्रंप की नीतियां या बदलती प्राथमिकताएं?
MBA in USA: अमेरिका में मैनेजमेंट की पढ़ाई भारतीय छात्रों के बीच काफी पॉपुलर रहा है। मगर अब दुनियाभर के स्टूडेंट्स यहां पढ़ने से कतरा रहे हैं। एक सर्वे में ये बात सामने आई है।

नई दिल्ली। MBA in USA : अमेरिका एक वक्त मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन देश था। मगर अब स्थिति बदल रही है, क्योंकि स्टूडेंट्स यहां पढ़ने से कतरा रहे हैं। ग्लोबल बिजनेस स्कूल में पढ़ने की इच्छा रखने वाले छात्रों के बीच 2025 में अमेरिका में कम पॉपुलर देश रहा है। इसके पीछे की वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां और पढ़ाई को लेकर बदल रही दिलचस्पी रही है। अमेरिका में हर साल भारतीयों समेत हजारों विदेशी छात्र MBA और मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं।
ग्रेजुएट मैनेजमेंट एडमिशन काउंसिल (GMAC) प्रोसपेक्टिव स्टूडेंट सर्वे 2026 के मुताबिक, अमेरिका में मैनेजमेंट कोर्स में एडमिशन लेने की प्लानिंग कर रहे स्टूडेंट्स का हिस्सा साल की पहली तिमाही में 63% से घटकर 2025 की चौथी तिमाही तक 52% हो गया। मध्य और दक्षिण एशिया के छात्रों में ये गिरावट और भी ज्यादा देखी गई है। जहां इस अवधि के दौरान अमेरिकी स्कूलों में आवेदन करने की इच्छा रखने वाले छात्रों में अमेरिका को लेकर दिलचस्पी में 23 प्रतिशत अंक गिरावट की देखी गई, जो 72% से 49% हो गई।
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क्यों अमेरिका में नहीं पढ़ना चाहते स्टूडेंट्स?
दरअसल, अमेरिका को लेकर दिलचस्पी घटने के पीछे की एक प्रमुख वजह भू-राजनीतिक भी है। अमेरिका के कई देशों के साथ रिश्ते खराब भी हुए हैं, जिसकी वजह से इन मुल्कों के छात्र यहां पढ़ना नहीं चाहते हैं। इसी तरह से ट्रंप सरकार ने कई तरह की इमिग्रेशन नीतियों को बदला है, जिसकी वजह से अब भारतीयों समेत विदेशी छात्रों को लग रहा है कि अगर वे यहां डिग्री ले भी लेते हैं, तो इसके बाद भी जॉब के लिए दिक्कतें कम नहीं होने वाली हैं। सबसे ज्यादा चिंता वीजा को लेकर है, क्योंकि OPT के लिए भी रास्ते कठिन किए जा रहे हैं।
कहां पढ़ने जाने में है छात्रों की दिलचस्पी?
इस वक्त स्टूडेंट्स ऐसे देशों में डिग्री लेने जाना चाहते हैं, जहां राजनीतिक स्थिति ठीक हो और पढ़ाई के बाद जॉब के ज्यादा अच्छे अवसर हों। जैसे स्टूडेंट्स के बीच ज्यादा दिलचस्पी पश्चिमी यूरोप के देशों जैसे ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड को लेकर भी है। इन देशों में अमेरिका की तुलना में ज्यादा कम दाम में डिग्री भी मिल जा रही है, जो कम बजट वाले छात्रों के लिए फायदे का सौदा है। इसी तरह से इन देशों में ग्लोबल कंपनियों की मौजूदगी की वजह से नौकरी के लिए भी ज्यादा धक्के खाने की नौबत नहीं आ रही है।



