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सेना ने दिया संदेश : भावनाओं को दबाएं नहीं, साझा करें,छात्रों को सिखाया मानसिक संतुलन का महत्व

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मेरठ के केंद्रीय विद्यालय और आर्मी पब्लिक स्कूल में सैन्य अस्पताल ने दो दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया

स्कूल रिपोर्टर, मेरठ : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सैन्य अस्पताल मेरठ की ओर से दो दिवसीय जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पंजाब लाइंस और आर्मी पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, तनाव प्रबंधन और इंटरनेट की लत जैसे मुद्दों पर मार्गदर्शन दिया गया।

दो दिनों में करीब दो हजार विद्यार्थियों ने इस अभियान में भाग लिया। सैन्य अस्पताल के मनोचिकित्सक लेफ्टिनेंट कर्नल रचित शर्मा ने कहा कि जीवन की परीक्षा हर दिन चलती है। अच्छी नींद, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी हैं। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने माता-पिता की अपेक्षाओं, डांट के बाद बेचैनी, गुस्से और हताशा पर नियंत्रण जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे।कार्यक्रम में प्रधानाचार्य डॉ. रीता गुप्ता सहित विद्यालय के शिक्षकगण उपस्थित रहे।

देश में लगभग 10 से 20 प्रतिशत किशोर किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझते हैं, जबकि 50 प्रतिशत वयस्कों में मानसिक रोग 14 वर्ष की आयु से पहले ही शुरू हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि किशोर लड़कों में सबसे आम समस्या नशे की लत (37%) है, जबकि लड़कियों में चिंता और तनाव से जुड़ी परेशानियां (61%) पाई जाती हैं।लेफ्टिनेंट कर्नल रचित शर्मा, सैन्य अस्पताल के मनोचिकित्सक

इमोशनल इंटेलिजेंस के पांच तत्व

मनोचिकित्सक ने सेल्फ अवेयरनेस, सेल्फ रेगुलेशन, मोटिवेशन, एम्पथी और सोशल स्किल्स — की व्याख्या करते हुए बताया कि भावनाओं को समझना और नियंत्रित करना मानसिक संतुलन का आधार है।

 

इंटरनेट के अधिक उपयोग से बढ़ता है डोपामाइन

कार्यक्रम में कैप्टन नेहा पुरी ने छात्रों को इंटरनेट एडिक्शन और साइबर बुलिंग के खतरों से आगाह किया। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से डोपामिन का स्तर बार-बार बढ़ता है, जिससे व्यक्ति उसमें उलझ जाता है। उन्होंने कहा ऑनलाइनधमकियां देना, अफवाहें फैलाना या दूसरों की निजी जानकारी साझा करना साइबर अपराध है। ऐसे मामलों में जवाब दें, ब्लॉक करेंऔर तुरंत किसी विश्वसनीय व्यक्ति को बताएं।

जब आप गुस्से में या दुखी हों, तो अपनी भावनाओं को भीतर न दबाएं। किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करें। यही मानसिक स्वास्थ्य का पहला और सबसे जरूरी कदम है। –कर्नल ऋषि ढिल्लन,सैन्य अस्पताल के कार्यवाहक कमांडेंट।

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