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UGC ने विश्वविद्यालयों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री प्रोग्राम को बढ़ावा देने का किया आग्रह

UGC ने अपने एक नोटिस में कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले सामान्य डिग्री कार्यक्रमों में अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप को एम्बेड करने के लिए इंटर्नशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम विकसित किया गया है.

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च संस्थानों से अप्रेंटिस /इंटर्नशिप डिग्री कोर्सेज को बढ़ावा देने का आग्रह किया है। आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों को विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले सामान्य डिग्री कोर्सेज में अप्रेंटिस/इंटर्नशिप को एम्बेड करने के लिए अप्रेंटिस/इंटर्नशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम की पेशकश करने के लिए कहा है।

आधिकारिक नोटिस में लिखा है, ”जैसा कि आप जानते हैं, 2020-21 की बजट घोषणा के अनुरूप और नए स्नातकों को आवश्यक ज्ञान, दक्षताओं और दृष्टिकोण के साथ रोजगार के लिए तैयार करने के उद्देश्य से, यूजीसी ने उच्च शिक्षा संस्थानों को अप्रेंटिस की पेशकेश के लिए दिशानिर्देश बनाए हैं। विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले सामान्य डिग्री कार्यक्रमों में अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप को एम्बेड करने के लिए इंटर्नशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम विकसित किया गया है।”

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आयोग ने विश्वविद्यालयों से यह भी अनुरोध किया है कि यदि वे इस तरह के अप्रेंटिसशिप/इंटर्नशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम को पेश कर रहे हैं तो प्रासंगिक जानकारी गूगल फॉर्म पर साझा करें। यूजीसी द्वारा साझा किए गए आधिकारिक नोटिस पर गूगल फॉर्म का लिंक उपलब्ध है। जानकारी जमा करने की आखिरी तारीख 10 अक्टूबर, 2021 तक है।

छात्रों की रोजगार क्षमता में सुधार के लिए केंद्रीय बजट 2020-21 में अप्रेंटिसशिप-एम्बेडेड डिग्री और डिप्लोमा कार्यक्रमों की घोषणा की गई थी। पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अगस्त में इंटर्नशिप-एम्बेडेड डिग्री कार्यक्रमों की पेशकश करने के लिए यूजीसी के दिशानिर्देश जारी किए थे।

हाल ही में UGC ने जारी किया था ये निर्देश

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी कर्मचारी और शिक्षक किसी समुदाय के या किसी श्रेणी के छात्र के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करे। आयोग ने विश्वविद्यालयों से वर्ष 2020-21 के दौरान जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों एवं उनके संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।

विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिखे पत्र में यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा, ”कर्मचारियों और शिक्षकों को सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई कर्मचारी और शिक्षक किसी समुदाय के या किसी श्रेणी के छात्र के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करें।”

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